भारत राष्ट्र की संपूर्ण चेतना का प्रतीक राम लला का राष्ट्र मंदिर समूचे विश्व को अध्यात्म की नई राह पर ले जाएगा, यह निश्चित है। राम लला के भव्य मंदिर के लिए तमाम धन्ना सेठ खजाने खोले बैठे थे, किंतु राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतवासियों से ही समर्पण निधि लेने का निर्णय किया। ये सर्वथा उचित ही था। सभी भारतीयों के रोम-रोम में राम सदियों से समाए हैं। इस कारण उनका मंदिर भारतीय नागरिकों के सहयोग से ही बने, यह निर्णय स्वागत योग्य था। समर्पण निधि अभियान के कार्यकर्ताओं को जो अनुभव हुए, वे अभूतपूर्व रहे।
पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर में रहने वाले वृद्ध सोहन की पत्नी ने एक दिन उनसे और बच्चों से कहा कि वे अपने सारे आभूषण राम लला के मंदिर निर्माण के लिए देना चाहती हैं। कुछ दिनों बाद ही पत्नी का निधन होने पर सोहन जी ने उनकी इच्छा पूरी करने के लिए निधि समर्पण कार्यकर्ताओं से संपर्क किया। कार्यकर्ता उनके घर पहुंचे, तो सोहन जी ने पत्नी के सारे आभूषण उन्हें भेंट करने चाहे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पहले वे विधि-विधान से पत्नी का अंतिम संस्कार करें, वे बाद में आकर उनकी इच्छा पूरी कर देंगे। बाद में यह बताने पर कि आभूषण निधि समर्पण में नहीं लिए जा सकते, सोहन जी ने पास के ही एक सुनार से गहनों का मूल्यांकन कराया और सात लाख, नौ हजार रुपये का चेक समर्पण निधि के तौर पर कार्यकर्ताओं को दिया। इतना ही नहीं, कुछ दिन बाद उन्होंने समर्पण निधि कार्यकर्ताओं को बुला कर 21 हजार रुपये का चेक और दिया और कहा कि पहला समर्पण पत्नी का था और ये उनकी तरफ से है। आराध्य के प्रति यह समर्पण भाव अद्वितीय है।
अभियान के कार्यकर्ताओं ने राजस्थान के ही मारवाड़ में गुड़ामालानी की सडाधनजी की ढाणी जाने की ठानी। रास्ता आसान नहीं था। कई घंटों की मशक्कत के बाद टोली वहां पहुंची। सडाधनजी को फोन पर पहले ही सूचित कर दिया गया था। उन्होंने टोली का स्वागत किया। सारे पुरुष एकत्र हो गए, तो घर के अंदर से चारपाई पर लेटी 101 साल की माता जी को बाहर लाया गया। वे लेटे-लेटे राम नाम की माला जप रही थीं। टोली को देख कर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई। कार्यकर्ताओं ने चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। सडाधनजी ने माता जी के हाथों से पांच लाख, पांच हजार, एक रुपये का निधि समर्पण कराया।
राजस्थान का एक और उदाहरण भी बहुत हृदय स्पर्शी है। झालावाड़ के अकलेरा में रहने वाले कंवर लाल मीणा की बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं। अभियान टोली उनके निवास पर पहुंची, तो उन्होंने बताया कि बेटी के दहेज के लिए जोड़ी गई राशि में कुछ कटौती कर वे पांच लाख रुपये का चेक दे रहे हैं। अंदर बैठी बेटी यह वार्तालाप सुन रही थी। वह बाहर निकली और पिता से दहेज की पूरी राशि समर्पित करने को कहा। पिता कंवर लाल मीणा और अभियान टोली ने उसे बहुत समझाया, पर वह नहीं मानी। तो पिता ने पूरी राशि का चेक निधि समर्पण के तौर पर बेटी के हाथ से ही दिलवाया। बाद में पिता ने टोली के प्रमुख सदस्य को फोन पर बताया कि बेटी के निधि समर्पण के बारे में जब ससुराल पक्ष को जानकारी मिली, तो वे बिना दहेज के ही शादी करने को तैयार हो गए।
झालावाड़ में खानपुर के पास गोलाना गांव में एक महिला ने निधि समर्पण कार्यकर्ताओं से स्वयं संपर्क कर उन्हें घर बुलाया। महिला के पति स्कूल में पढ़ाते थे और कुछ दिन पहले ही उनकी मृत्यु हुई थी। उसकी स्थिति देखते हुए कार्यकर्ताओं के अनुमान के उलट उन्होंने तीन लाख रुपये की निधि मंदिर के लिए समर्पित की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बताया कि यह उनके पति की अंतिम इच्छा थी।
राजस्थान के ये कुछ उदाहरण सिद्ध करते हैं कि क्या युवा, क्या बुजुर्ग, स्त्री-पुरुष, सभी ने राम लला के राष्ट्र मंदिर के लिए निधि समर्पण में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। निधि समर्पण के रूप में देशवासियों ने अपनी समूची भावनाएं उड़ेल दीं। अपनी हैसियत से अधिक राशि मंदिर के लिए समर्पित की। राम लला के भव्य-दिव्य मंदिर की बात हो, तो भारत के भविष्य बालक निधि समर्पण में कैसे पीछे रह सकते हैं। बालकों और किशोरों ने भी स्वत: स्फूर्त भावना से मंदिर के लिए गुल्लकें तोड़ दीं। राजस्थान में भरतपुर की नवाब गली में निधि समर्पण कार्यकर्ता जब बालक दिव्यांश प्रजापति के घर पहुंचे, तो उसने अपनी गुल्लक उन्हें दे दी। गली में इस बात की चर्चा हुई, तो और घरों के बालकों ने भी दिव्यांश का अनुसरण किया।
राम जन-जन के हैं, सबके हैं। इस बात को कभी सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी वर्ष 2021 में उनके मंदिर के लिए हुआ निधि समर्पण अभियान इस बात का सर्वाधिक उपयुक्त उदाहरण है। राम भारत की, सनातन परंपरा की नस-नस में समाए हैं। बिना उनके कुछ नहीं है। जन्म है, तो राम हैं। जीवन है, तो राम के बिना नहीं है औऱ मृत्यु है, तो राम ही सद्गति का कारण हैं। राम ही राष्ट्र हैं, राष्ट्र ही राम है।
- कल्पना पाराशर
(लेखिका, समाज सेवी और वरिष्ठ स्तंभकार हैं)