प्राण प्रतिष्ठा समारोह पूरी तरह से सनातनी व वैदिक परंपराओं के अनुसार ही होगा। 22 जनवरी को 84 सेकंड के अभिजीत मुहूर्त में होने वाले समारोह के मुख्य यजमान एक दंपती होंगे।
दंपती को 15 जनवरी से ही उपवास, जप, तप, हवन, स्नान और दान समेत 45 नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। उन्हें लकड़ी की चौकी पर सोना होगा। ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। आलोक कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट...
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा के यजमान के लिए नियमों पर काशी के विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ से सलाह मांगी थी।
उन्होंने कोषाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा है कि मुख्य यजमान को आठ दिनों तक सभी 45 नियमों का पालन करना होगा। इसमें प्रायश्चित, गोदान, दशविध स्नान, प्रायश्चित क्षौर और पंचगव्यप्राशन भी शामिल है। इन नियमों के अनुसार अपनी जीवनचर्या बदलनी होगी।