बेटा कब क्या करता था परिवार वालों को नहीं पता?
बताया जा रहा है भूपेंद्र किसी से बात नहीं करता था। वह सिर्फ फोन पर अपने पिता से बात किया करता था। वह भी जरूरत पड़ने पर। ज्यादा समय वह अपने कमरे में ही बंद रहता था और अधिकतर समय उसका मोबाइल पर ही बीतता था। वह फोन पर गेम खेलने का भी आदी था। परिवार वालों से उसकी इस कदर दूरी थी कि वह कब खाना खाता और घर से बाहर चला जाता इसकी जानकारी भी परिवार वालों ज्यादा नहीं होती थी।
आखिरी बार 23 जून को पिता से हुई थी बात
मृतक के पिता नरेंद्र ने पुलिस को बाताया कि भूपेंद्र ने बाथरूम का पानी खत्म होने पर 23 जून की शाम को उन्हें फोन किया था। इसके बाद उन्होंने पानी भर दिया, तब से उनकी उससे बात नहीं हुई। वह किसी से बात नहीं करता था। कई-कई दिन तक अपने कमरे में ही रहता था। उसकी इस आदत के कारण परिवार वाले भी उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। पिता ने पुलिस से कहा कि किसी भी जरूरत पर वह मुझे कॉल कर बता दिया करता था।
मोबाइल से नंबर, मैसेज सब डिलीट
बताया जा रहा है कि घर में भूपेंद्र का कमरा अलग-थलग है। वह उसी में रहा करता था। न कोई उसके कमरे में जाता था और न ही वह किसी के कमरे में आता था। पुलिस ने उसके कमरे से जो मोबाइल फोन बरामद किया है। वह भी एकदम खाली है। उसमें किसी का एसएमएस, कॉल और यहां तक की नंबर भी नहीं हैं। सभी डिलीट कर दिए गए हैं। शनिवार सुबह किए गए पिता के मिस्क कॉल के अलावा उसके फोन में कुछ नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि आत्महत्या से पहले उसने सब कुछ डिलीट कर दिया होगा।
23 जून को आत्महत्या का अंदेशा
पुलिस का मानना है कि 23 जून की देर शाम या रात को भूपेंद्र ने फांसी लगा ली थी। हालांकि, पुलिस अभी कुछ भी साफ कहने से इंकार कर रही है। पुलिस का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकता है। इसके अलावा भी भूपेंद्र की मौत से जुड़े कई सवाल ऐसे हैं जिनके पुलिस को जवाब तलाशने हैं।