राजस्थान में महीनों से चल रही मंत्रीमण्डल विस्तार की चर्चाओं पर सोमवार को विराम लग गया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस कार्यकाल में पहली बार अपनी टीम का विस्तार किया और 15 नए मंत्री शामिल कर लिए।
इनमें से चार कैबिनेट, 6 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 5 राज्यमंत्री घोषित किए। छह विधायक पहली बार मंत्री पद संभालेंगे। मंत्रीमंडल विस्तार में जातिगत समीकरण का थोड़ा ध्यान रखा है, लेकिन क्षेत्रीय समीकरण गड़बड़ाए से लग रहे हैं।
इधर, स्वयं सेवक संघ की खास नहीं चल पाई। संघ पृष्ठभूमि से मात्र एक को जगह मिली। राज्यपाल कल्याण सिंह ने सभी को राजभवन परिसर में शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद अब वसुंधरा टीम में कुल मंत्रियों की संख्या 25 हो गई है। समारोह के दौरान राज्यपाल ने सभी को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
लोकसभा चुनाव के बाद से ही राजस्थान में मंत्रीमण्डल विस्तार का इंतजार था, लेकिन भाजपा आलाकमान की हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनावी व्यस्तता के कारण वसुंधरा राजे को समय नहीं मिल पा रहा था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट भी वसुंधरा राजे को उनकी अधूरी टीम के लिए बार-बार घेर रहे थे। उप चुनाव में भी परिणाम भाजपा के खिलाफ आए थे। उप चुनाव में चार में से तीन सीटें कांग्रेस के खाते में गई थी। जबकि भाजपा को विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल हुई थी।
जातिगत समीकरण साधने की कोशिश
वसुंधरा राजे ने अपनी टीम के विस्तार में जातिगत समीकरणों का ध्यान रखने का पूरा प्रयास किया। उन्होंने जाट समाज और दलित समाज से तीन-तीन विधायकों को जगह दी।
जाट समाज से डॉ. राम प्रताप, अमराराम व कृष्णेन्द्र कौर दीपा को और दलित वर्ग से अनीता भदेल, बाबूलाल वर्मा व अर्जुन गर्ग को जगह दी है। राजपूत समाज से राजपाल सिंह शेखावत व पुष्पेन्द्र सिंह, पिछड़ा वर्ग से सुरेन्द्र गोयल व ओटाराम देवासी तथा ब्राह्मण समाज से राजकुमार रिणवा, वैश्य समाज से किरण माहेश्वरी, सिंधी समाज से वासुदेव देवनानी और सिख से सुरेन्द्र पाल टीटी को शामिल किया गया है।
क्षेत्रीय समीकरणों में हाड़ौती, पूर्वी राजस्थान और शेखावाटी को अनदेखा गया है। जयपुर, अजमेर, बीकानेर व जोधपुर सम्भागों को अच्छा प्रतिनिधित्व मिला है। वासूदेव देवानानी संघ पृष्णभूमि से माने जाते हैं और उन्होंने संस्कृत में शपथ ली। इधर, वसुंधरा ने अपने विस्तार में तीन महिलाओं को भी जगह दी, जिसमें से एक कैबिनेट मंत्री हैं।