राजस्थान के सोजात शहर के 26 साल के रामचंद्र की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। अपनी मेहनत और लगन के दम पर आज उन्होंने अपनी किस्मत पलट दी। राम गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। लेकिन गूगल तक पहुंचने का उनका सफर इतना भी आसान नहीं था।
राम आज गूगल के सीएटल, अमेरिका के ऑफिस में कार्यरत हैं। लेकिन उनके पिता आज भी मजदूरी करते हैं। पिता तेजाराम संखला ने घर बैठना उचित नहीं समझा और पहले की तरह ट्रकों पर सामान लोडिंग का काम करते रहने का फैसला किया। इसके एवज में तेजाराम रोजाना 100 से 400 रुपये कमाते हैं।
हालांकि, राम कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता को मना किया लेकिन वह खाली नहीं बैठना चाहते। उनके पिता तेजाराम रोजाना मेंहदी की बोरियां ढोने का काम करते हैं और 100 से लेकर 400 रुपये तक कमा लेते हैं। लेकिन इस पिता-पुत्र की कहानी वाकई प्रेरणादायक है। रामचंद्र को अंग्रेजी नहीं आती थी, क्योंकि उसने स्कूली पढ़ाई हिंदी माध्यम से थी। रामचंद्र की अंग्रेजी सीखने की कला भी वाकई जुदा है। उसने अंग्रेजी फिल्म के सब टाइटल्स को देखते हुए अंग्रेजी सीखी।
राम ने सोजत से पढ़ाई पूरी करने के बाद कोटा में इंजीनियरिंग के लिए कोचिंग ली। राम बचपन से ही पढा़ई में अच्छे थे और स्कूल और कॉलेज के दौरान उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली। पढा़ई के दौरान कई लोगों ने उनकी मदद की। किसी ने उन्हें कपड़े दिए तो कुछ लोगों ने लैपटॉप खरीद कर दिया। साल 2009 में आईआईटी-रूड़की में उन्हें एडमिशन मिल गया और अपनी पहली नौकरी उन्हें गूगल इंडिया में मिली।