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Sidhu Moose Wala : हत्या में स्टेट बॉक्सिंग चैंपियन भी शामिल, 15 साल की उम्र में बानूड़ा कैसे बना गैंगस्टर?

Tue, 07 Jun 2022 10:56 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर

सार

सिद्धू मूसेवाला की हत्या में गैंगस्टर सुभाष बनूड़ा भी शामिल था। यह वही अपराधी है, जिसने सरेंडर के दौरान आईपीएस दिनेश एमएन को कहा था कि वो उनकी तरह अच्छा इंसान बनना चाहता है।
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सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शामिल सुभाष बनूड़ा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के तार राजस्थान से जुड़े हैं। सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शामिल आठ शूटरों में से एक राजस्थान के सीकर का सुभाष बानूड़ा का भी नाम सामने आया है। जिससे खलबली मच गई है। बॉक्सिंग का स्टेट चैंपियन रह चुके सुभाष ने 15 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। वह गैंगस्टर आनंदपाल के गैंग में भी काम कर चुका है।

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दसवीं तक की पढ़ाई
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार सुभाष बानूड़ा को बॉक्सिंग बहुत पसंद था। क्राइम की दुनिया में आने से पहले वो हिसार में बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रहा था। उसने दसवीं तक पढ़ाई की है। सुभाष दसवीं में 70 प्रतिशत से पास हुआ था लेकिन इसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ अपराध की दुनिया में एंट्री ली।

पिता की मौत का बदला लेने के लिए बना गैंगस्टर
सुभाष गैंगस्टर बलवीर बानूड़ा का बेटा है। बलवीर और गैंगस्टर आनंदपाल दोस्त थे। 23 जुलाई 2014 को बीकानेर जेल में बलबीर बानूड़ा और आनंदपाल पर हमला हुआ। हमले में बलबीर की मौत हो गई। बीकानेर जेल में चली गोलियों ने 14 साल के सुभाष की जिंदगी को बदल दी। बॉक्सिंग छोड़ सुभाष पिता की मौत का बदला लेने के लिए जुर्म की राह पर निकल पड़ा। वह आनंदपाल गैंग से जुड़ गया।

15 साल की उम्र में पहला केस दर्ज
सुभाष ने महज 15 साल की उम्र में पहला जुर्म किया। 13 मार्च 2015 को वह अपने गांव में पिता बलवीर बानूड़ा के साथियों के साथ एक फार्म हाउस पर था। पुलिस ने वहां छापा मारा और छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वहां से हथियार बरामद हुआ। हालांकि, सुभाष वहां से भागने में सफल रहा। पुलिस ने उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का केस दर्ज किया। यहीं से उसके जुर्म के बहीखाते की शुरूआत हो गई। 

आनंदपाल की मौत के बाद सुभाष बराल गैंग से जुड़ा
सुभाष के पिता बलबीर की मौत का बदला आनंदपाल ने ले लिया। उसने ईंट-पत्थरों से राजू ठेहट गैंग के दो लोगों की हत्या कर दी। पुलिस जब आनंदपाल को पेशी पर ले जा रही थी, तभी वह फरार हो गया। 24 जून 2017 को मौलासर में राजस्थान के सबसे बड़ा गैंगस्टर आनंदपाल पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। आनंदपाल के मारे जाने के बाद सुभाष बानूड़ा ने गैंगस्टर सुभाष बराल के लिए काम करना शुरू कर दिया। सुभाष पर फायरिंग और मारपीट सहित कई मामले दर्ज हैं। 

सुभाष बानूड़ा पुलिस का सिरदर्द बन चुका था। पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए दबिश देने लगी। ऐसे में बलबीर बानूड़ा के दोस्तों की मदद से वह डेढ़ साल तक फरार रहा। एक दिन सुभाष ने अचानक एसओजी ऑफिस पहुंचकर तत्कालीन एसओजी आईजी दिनेश एमएन के सामने सरेंडर कर दिया। 

दिनेश एमएन को कहा-मुझे अपराध की दुनिया से दूर जाना है
सुभाष दिनेश एमएन से बहुत प्रभावित था। उसने सरेंडर के दौरान कहा था कि अपराधी बनना तो आसान है लेकिन एक सच्चा ईमानदार आदमी बनना मुश्किल है। मै भी आईपीएस दिनेश एमएन की तरह अच्छा इंसान बनूंगा। मुझे अपराध की दुनिया से दूर जाना है। तब दिनेश एमएन ने उसकी पढ़ाई और बॉक्सिंग में मदद करने की बात कही थी। 

राजस्थान से आए हथियार 
मूसेवाला की हत्या के लिए जिन हथियारों का इस्तेमाल किया गया, वे राजस्थान से मंगाई गई थी। जोधपुर से हथियार लेकर बदमाश पंजाब पहुंचे थे। हत्या में शामिल बोलेरो भी राजस्थान की ही थी। यह बोलेरो बदमाश नसीब खान लाया था। फतेहाबाद में उसने चरणजीत को गाड़ी दी। इसी बोलेरो से मूसेवाला की रेकी की गई।
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थार जीप में जा रहे मूसेवाला को मारी गोली
बता दें कि 29 मई रविवार शाम को मूसेवाला घर से निकले थे, तभी से बोलेरो और कोरोला गाड़ी से उनकी थार जीप का पीछा किया गया और फिर रोककर उन पर कई राउंड फायर किए गए। इस फायरिंग में मूसेवाला की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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