रणथंभौर टाइगर रिजर्व की खंडार रेंज के फिरया नाका के पास गौघाटी वन क्षेत्र में आज गश्त के दौरान वनकर्मियों को एक नर बाघ का शव पड़ा हुआ मिला, जिस पर वनकर्मियों ने वन विभाग के अधिकारियों को बाघ की मौत की सूचना दी। सूचना पर रणथंभौर के डीएफओ रामानंद भाकर सहित वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, जहां मृत बाघ की शिनाख्त टाइगर टी 2312 के रूप में हुई।
बाघ की शिनाख्त होने के बाद वन विभाग की टीम ने टाइगर के शव को कब्जे में लिया और राजबाग चौकी नाका पहुंचाया। जहां रणथंभौर के पशु चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित किया गया और टाइगर शव का पोस्टमार्टम कर विसरा लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद विधिवत रूप से टाइगर के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
रणथंभौर के डीएफओ रामानंद भाकर एंव पशु चिकित्सक राजीव गर्ग के मुताबिक टाइगर टी 2312 की मौत किसी अन्य टाइगर के साथ हुई टेरिटोरियल फाइट की वजह से हुई है। टाइगर का शव करीब 15 से 16 घंटे पुराना है। डीएफओ ने बताया कि जिस जगह पर टाइगर टी 2312 का शव मिला है, उस इलाके में टाइगर टी 96 व टी 137 सहित टी 2311 का मूवमेंट रहता है , संभवतया इन्हीं में से किसी एक टाइगर के साथ हुए आपसी संघर्ष में टाइगर टी 2312 की मौत हुई है। मृत टाइगर के शरीर पर कई जगहों पर गहरे घाव थे, पशु चिकित्सक डॉ. राजीव गर्ग के मुताबिक टाइगर की मौत किसी दूसरे टाइगर के साथ हुई आपसी टेरिटोरियल फाइट के कारण ही हुई है। इस फाइट में टाइगर का हार्ट फट गया, लेंस फट गए और भी कई ऑर्गन डैमेज हो गए, जिससे उसकी मौत हो गई ।
गौरतलब है कि रणथंभौर में जनवरी 2023 से सितंबर 2024 तक करीब 13 टाइगर व शावकों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतम टेरिटोरियल फाइट के कारण थी। रणथंभौर 1700 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और 10 जोनों में बंटा हुआ है लेकिन क्षेत्रफल के मुताबिक रणथंभौर में बाघ-बाघिन और शावकों की संख्या अधिक है। ऐसे में इलाके की आपसी जंग को लेकर अब तक कई टाइगरों की मौत हो चुकी है।
बाघों के बीच आपसी संघर्ष को लेकर रणथंभौर के सीसीएफ अनूप के.आर. का कहना है कि क्षेत्र के हिसाब से बाघों की संख्या अधिक होने के साथ ही बाघों के बीच लिंग अनुपात भी बड़ा कारण है। उनका कहना है कि वाइल्ड लाइफ के मुताबिक एक नर बाघ पर दो मादा बाघिन का रेशो होना चाहिए लेकिन रणथंभौर में 31 बाघों पर 30 बाघिन हैं, जो लिंगानुपात के हिसाब से कम है और यह भी बाघों के बीच आपसी टकराव का बड़ा कारण है। साथ ही जैसे ही कोई शावक जवान होता है उसे भी अपना नया इलाका बनाना होता है और नया इलाका बनाने के दौरान उसकी अगर किसी बड़े बाघ से झड़प हो गई तो उस झड़प में भी उसकी मौत हो जाती है । खास तौर पर इलाके को लेकर आपसी टकराव के साथ ही बाघ-बाघिनों का लिंगानुपात भी बाघों के आपसी संघर्ष में किसी बाघ की मौत होने का बड़ा कारण है ।
रणथंभौर में बाघों का लगातार बढ़ता कुनबा, क्षेत्र कम पड़ना और नर बाघ के हिसाब से मादा बाघिनों की संख्या कम होने के कारण बाघों के बीच आपसी संघर्ष और टेरिटोरियल फाइट में रणथंभौर में अब तक कई बाघ-बाघिन और शावकों की मौत हो चुकी है, जो वन विभाग के लिए चिंता का विषय है।