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Satta ka Sangram : युवा बोले- नहीं हैं शिक्षा के लिए पर्याप्त अवसर, पेपर लीक में SOG से फायदे की उम्मीद

Mon, 01 Apr 2024 02:39 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' आज नागौर पहुंचा। सवेरे चाय पर चर्चा पर मतदाताओं के विचार जानने के बाद हमारी टीम युवाओं के बीच चुनावों को लेकर उनके विचार जानने युवाओं के बीच पहुंची।
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सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनावों को लेकर मतदाताओं के विचार जानने के लिए निकला अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' आज नागौर पहुंचा। चाय पर चर्चा के बाद युवाओं से उनके विचार जानने के लिए उनके बीच पहुंची हमारी टीम से यहां मौजूद युवाओं ने पेपर लीक, बेरोजगारी, एमएसपी और महंगाई समेत कई मुद्दों पर बात की। आइये जानते हैं चुनावों को लेकर क्या हैं युवाओं के विचार

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पेशे से शिक्षक दिनेश टांक ने बेरोजगारी और उच्च शिक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि युवाओं को शिक्षा के बेहतर अवसर यहां उपलब्ध नहीं है। कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। रोजगार की चाह रखने वाले युवाओं के लिए पेपर लीक जैसे मामले सामने आ जाते हैं। जबकि ग्रेजुएशन कर चुकी मीनाक्षी का कहना था कि नौकरियों के अवसर तो आते हैं लेकिन बार-बार चुनाव आने से आगे खिसक जाते हैं ऐसे में छात्रों की परेशानियां बढ़ जाती हैं। देश में एक बार में ही सारे चुनाव हो जाने चाहिए।

एसओजी से पेपरलीक में फायदे की उम्मीद

प्रदेश सरकार द्वारा पेपर लीक के मामलों के लिए गठित एसओजी को लेकर ऋषभ का कहना है कि शायद इससे पेपर लीक पर लगाम लगे। हाल ही में एसओजी ने कुछ फर्जी चयनित अभ्यर्थियों का पता कर उनके खिलाफ कार्रवाई की है, इससे कुछ उम्मीदें बंधी हैं।
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उच्च शिक्षा के अवसर नहीं हैं नागौर में

सुष्मिता भाटी और मोनू कछावा का कहना है कि उच्च शिक्षा के लिए पसंदीदा विषयों की कमी के साथ-साथ अवसरों की भी कमी है। मोनू का कहना है कि शिक्षा के नजरिये से देखा जाए तो नागौर प्रदेश का सबसे पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। सुष्मिता ने महिला सुरक्षा को लेकर भी अपने विचार रखे।

चुनाव के साथ आती है भर्ती सूची

बी.एड. की पढ़ाई कर रहे दीपक तंवर का कहना है चुनावों के साथ ही नौकरियों में भर्ती की सूची जारी होती है और चुनावों के बाद धीरे-धीरे अगले पांच सालों के लिए आगे सरक जाती है। बेरोजगारी ही एक सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसने युवाओं को परेशान कर रखा है। अग्निवीर योजना पर भी पुनर्विचार की जरूरत है।

तकनीकी कोर्स करने चाह रखने वाले युवाओं के लिए भी नागौर में पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। कई कोर्स तो यहां के कॉलेजों में हैं ही नहीं और जो हैं उनका उतना ज्ञान सीखाने वालों के पास ही नहीं है।

हालांकि केंद्र द्वारा चलाए जा रहे स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम लगभग हर जगह चलाए जा रहे हैं और कई युवा इसका लाभ भी ले रहे हैं लेकिन सरकारी नौकरी की चाह रखने वालों के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाने के कारण यह मुद्दा हावी होता जा रहा है।
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