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Rajasthan: संन्यासी बनी हीरा व्यापारी की बेटी के त्याग की कहानी, सात वर्ष की उम्र से पौषध व्रत, TV नहीं देखी

Wed, 18 Jan 2023 10:17 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

देवांशी ने कभी टीवी नहीं देखा। वह हिंदी, अग्रेजी, संस्कृत, जारवाड़ी और गुजराती सहित कुछ अन्य भाषाएं भी जानती हैं। देवांशी ने अब तक 357 दीक्षा, 500 किलोमीटर पैदल विहार, तीर्थों की यात्रा और जैन धर्म ग्रंथों का वाचन कर चुकी हैं।
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संन्यास की राह पर देवांशी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात के सूरत में एक हीरा व्यापारी की आठ साल की बेटी संन्यासी बन गई। बुधवार सुबह छह बजे से धनेश सांघवी की बेटी देवांशी की दीक्षा शुरू हो गई हैं। देवांशी सिरोही जिले के मालगांव की रहने वाली हैं और महज आठ साल की हैं। वह क्विज में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। इसके अलावा वे संगीत के सभी राग में गाना, भरतनाट्यम और योगा भी सीख चुकी हैं। देवांशी ने कभी टीवी नहीं देखा। वह हिंदी, अग्रेजी, संस्कृत, जारवाड़ी और गुजराती सहित कुछ अन्य भाषाएं भी जानती हैं। देवांशी ने अब तक 357 दीक्षा, 500 किलोमीटर पैदल विहार, तीर्थों की यात्रा और जैन धर्म ग्रंथों का वाचन कर चुकी हैं।

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देवांशी के जन्म पर उनके परिजनों ने नवकार महांमत्र श्रवण कराने  के साथ ही ओगे का दर्शन कराया था। 25 दिन की आयु में नवकारशी का पच्चखाण लेना और चार महीने में रात का भोजन त्याग शुरू किया। आठ महीने में त्रिकाल पूजन की शुरुआत की। एक साल क होने पर नवकार मंत्र का जाप भी शुरू कर दिया। एक साल तीन महीने की आयु में दीक्षा दर्शन शुरू किए। 

चार साल तीन महीने की उम्र में देवांशी ने गुरु भगवंतों के साथ रहना शुरू कर दिया। वे हर महीने में दस दिन गुरु भगवंतों के साथ रहती थीं। इस दौरान 37 बड़ी दीक्षा, 13 बड़ी दीक्षा और 250 साधु-साध्वी भगवंतों का गुरु पूजन किया। इसके दो महीने बाद चार साल पांच महीने की उम्र में देवांशी ने ह्रदय प्रदीप और कर्मग्रंथ का वाचन शुरू कर दिया था। 
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पांच वर्ष की आयु में प्रवेश करने पर दीक्षा विधि कंठस्थ की और फिर आराधना भी शुरू कर दी। पांच साल चार महीने का होने पर देवांशी ने एक ही दिन में आठ सामायिक, दो प्रतिक्रमण और एकासणा शुरू कर दिया था। सात साल की आयु में आते ही उन्होंने पौषध व्रत शुरू कर दिया था।   

साधारण जीवन जीता है परिवार
देवांशी के पिता धनेश सांघवी हीरा कारोबारी हैं। उनकी सूरत में संघवी एंड संस नाम की हीरा कंपनी है, जो दुनिया की सबसे पुरानी हीरा कंपनियों में से एक है। धनेश और उनकी पत्नी अमी के दो बेटियां हैं। देवांशी उनकी बड़ी बेटी हैं। करोड़ों की संपत्ति होने के बाद भी हीरा कारोबारी का परिवार साधारण जीवन जीता है। कई साल के त्याग के बाद देवांशी ने संन्यास की राह पर चलने का फैसला किया।  

देवांशी आज का दीक्षा कार्यक्रम आज सुबह छह बजे सूरत में शुरू हुआ। हजारों लोगों की मौजूदगी में देवांशी जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा ले रही हैं। देवांशी ने साध्वी प्रशमिता से वैराग्य की शिक्षा ग्रहण की है। उसकी दीक्षा लेने की इच्छा को साध्वी चारूदर्शना ने मजबूत किया।

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