कांग्रेस ने अनिल शर्मा को बनाया है उम्मीदवार
सरदारशहर की सीट कांग्रेस के कद्दावर नेता पंडित भंवरलाल शर्मा के निधन से खाली हुई है। भंवरलाल शर्मा 7 बार विधायक भी रह चुके हैं। लंबी बीमारी के बाद 9 अक्टूबर को उनका निधन हो गया था। सहानुभूति को देखते हुए कांग्रेस ने भंवरलाल शर्मा के बेटे अनिल शर्मा को टिकट दे दिया है। अनिल शर्मा राजस्थान आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन हैं। गहलोत सरकार में उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी मिला हुआ है। बताया जा रहा है कि अनिल शर्मा का टिकट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने फाइनल किया था। जिसके बाद एआईसीसी के जनरल सेक्रेट्री इंचार्ज मुकुल वासनिक ने प्रेस रिलीज निकालकर सार्वजनिक घोषणा की थी।
भाजपा ने अशोक कुमार पिंचा को दिया टिकट
भाजपा ने पूर्व विधायक अशोक कुमार पिंचा को उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया है। पिंचा सरदारशहर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार चुनाव लड़ चुके हैं। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा की ओर से विधायक चुने गए, जबकि चार बार उनकी हार हुई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के भंवर लाल शर्मा ने पिंचा को करीब 17 हजार मतों से हराया था। उपचुनाव में भाजपा ने पिंचा को एक बार फिर मौका दिया है।
नामांकन के बाद गहलोत ने शर्मा के समर्थन में की सभा।
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अनिल शर्मा के लिए वोट मांगे पहुंचे गहलोत
इधर, कांग्रेस उम्मीदवार अनिल शर्मा ने शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। उनके साथ कांग्रेस के कई नेता मौजूद रहे। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद एक जनसभा का आयोजन भी किया गया। जिसमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित अन्य नेता और मंत्री शामिल हुए। सभी ने जनता से अनिल शर्मा को जिताने की अपील की।
पिंचा ने नामांकन दाखिल किया, यह बोले पूनिया
अशोक कुमार पिंचा ने गुरुवार को नामांकन दाखिल कर दिया था। इससे पहले चूरू के सरदारशहर में ताल मैदान से गांधी चौक तक रैली निकाली गई। जिसमें केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, सीकर सांसद मंहत सुमेधानंद सरस्वती, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़, पूर्व सांसद राम सिंह कस्वां, सहित कई नेता शामिल हुए थे। नामांकन दाखिल करने के बाद एक जनसभा को प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने संबोधित किया था। पूनिया ने कहा था कि, सरदारशहर चुनाव को लेकर कुछ लोग कहते हैं कि सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं कोई भविष्यवाणी तो नहीं करता हूं, लेकिन मुझे यह साफ दिख रहा है कि अशोक गहलोत की सरकार का भले ही एक साल बाकी है, पर यह सरकार वेंटिलेटर पर आखिरी सांस ले रही है, कब सांसें उखड़ जाएं कोई भरोसा नहीं है।