राजस्थान में जारी सियासी संकट का मामला देखते-देखते राजभवन, विधानसभा और फिर कोर्ट तीनों जगह पहुंच चुका है। राज्य में जिस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है, उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह विवाद लंबा चलने वाला है। हालांकि, यह पहली बार है कि बागी विधायक अयोग्य ठहराए जाने को कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश में भी सत्र को लेकर हो चुका है टकराव
गौरतलब है कि ऐसी ही एक स्थिति अरुणाचल प्रदेश में उत्पन्न हुई थी, जब मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने राज्यपाल को 14 जनवरी 2016 को विधानसभा सत्र बुलाने को कहा। लेकिन राज्यपाल ने इसके उलट एक महीने पहले ही 16 दिसंबर 2016 को सत्र का आयोजन किया। इस कारण राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो गया।
वहीं, मुख्यमंत्री तुकी ने इस फैसले का विरोध करते हुए विधानसभा भवन पर ताला लगवा दिया। दूसरी तरफ, विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। राज्यपाल ने कहा कि उनके निर्णय को लेकर अदालत दखलअंदाजी नहीं कर सकती है।
इसके बाद यह मामला पांच न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा गया। सुनवाई के दौरान, 13 जुलाई 2016 को देश की शीर्ष अदालत ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री की अनुशंसा के विपरीत समय से पूर्व सत्र बुलाने का फैसला असंवैधानिक था।