नागौर जिले में दो लोकसभा क्षेत्र लगते हैं, जिसमें नागौर लोकसभा और राजसमंद लोकसभा क्षेत्र आता है। नागौर में कुल 10 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिसमें से मेड़ता विधानसभा क्षेत्र, जो की राजसमंद जिले में आता है। नौ विधानसभा नागौर के लोकसभा क्षेत्र में आते हैं। नागौर में चार जगह पर विश्व प्रसिद्ध पशु मेला भरता है, जिसमें नागौर का बाबा रामदेव पशु मेला विश्व विख्यात है। पशु मेला, जो की नागौरी नस्ल के बैलों के लिए प्रसिद्ध है।
नागौर की पान मेथी जो की अपनी खुशबू के लिए विश्व विख्यात है। नागौर लोकसभा चुनाव में दो समुदाय के उम्मीदवार आमने-सामने रहते हैं, जिसमें एक समुदाय एक बड़े वोट बैंक में बांट की संभावना होती रहती है। आपको बता दें कि पिछले चार-पांच दशक से नागौर लोकसभा सीट पर लोकसभा चुनाव में अधिकतर मुकाबला दो जाट उम्मीदवार के बीच होता रहा है। इस बार भी जाट वोटों का ध्रुवीकरण होगा। लेकिन जीत किस दल के नसीब में होगी, यह आने वाला समय तय करेगा।
पिछले लोकसभा में 25 की 25 सीटों पर जीतने वाली बीजेपी ने नागौर सीट पर रालोपा से गठबंधन कर लिया था और नागौर की सीट ही छोड़ दी थी। RLP पार्टी के सुप्रीमो नागौर के सांड बन गए थे।कुछ दिनों बाद कृषि के तीनों कानून केंद्र सरकार द्वारा पारित करने पर RLP पार्टी का बीजेपी से गठबंधन टूट गया। इस बार फिर रालोपा पार्टी जिस पार्टी के साथ गठबंधन करेगी, नागौर की सीट उस पार्टी के खाते में जाएगी।
50 साल से जाट परिवार का दबदबा
इस बार रणनीति में 50 साल से दबदबा रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री नाथूराम मिर्धा की पोती और नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा को लोकसभा में टक्कर केवल हनुमान बेनीवाल ही दे सकते हैं। आपको बता दें कि साल 1977 के चुनाव से लगातार नागौर लोकसभा सीट पर जाट उम्मीदवार ही जीतता आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में दो रिजर्व सीट को छोड़कर बाकी आठ सीटों पर जाट प्रत्याशी जीत पाए, जिसके कारण जीत के बाद जाट प्रत्याशियों ने नागौर को जाट लैंड के रूप में उभार दिया। इस बार कयास यह लगाया जा सकता है कि दो जाट प्रत्याशी ही लोकसभा के चुनाव लड़ेंगे। दोनों जाट प्रत्याशी आमने-सामने होने से इस चुनाव में एक बड़े वोट बैंक के बंटने की संभावना भी है।
नागौर लोकसभा सीट का इतिहास
नागौर लोकसभा सीट पर अब तक हुए लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक छह बार सांसद बने। साल 1977, 1980, 1984, 1981, 1991 एवं 1996 में चुनाव लगातार जीते। नाथूराम मिर्धा ने साल 1990 में जनता दल तथा शेष चावन में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता। उनके निधन के बाद साल 1997 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र भानु प्रकाश मिर्धा ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। उसके बाद साल 1998 एवं 1999 में कांग्रेस के राम रघुनाथ चौधरी 2004 में भाजपा के भंवर सिंह डांगावास एवं 2009 में कांग्रेस की ज्योति मिर्धा ने चुनाव जीता है। साल 1984 में पूर्व केंद्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा ने लोकसभा चुनाव जीता था। नागौर से पहले लोकसभा चुनाव निर्दलीय जीडी सोमानी ने जीता था। दूसरा चुनाव कांग्रेस के मथुरादास माथुर तथा तीसरा लोकसभा चुनाव कांग्रेस के एनके सोमानी ने जीता। साल 2019 के चुनाव में बीजेपी ने रालोपा पार्टी से गठबंधन किया था, जिसमें हनुमान बेनीवाल चुनाव जीते थे।
यह थे प्रत्याशी, जो लोकसभा चुनाव जीते
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1952-57 तक जीडी सोमानी - निर्दलीय
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1957-62 तक माथुरादास माथुर - कांग्रेस
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1962-67 तक एसके डे - कांग्रेस
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1967-71 तक एनके सोमानी - स्वतंत्र पार्टी
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1971-77 तक नाथूराम मिर्धा - कांग्रेस
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1980-84 तक नाथूराम मिर्धा - कांग्रेस (यू)
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1984-89 तक रामनिवास मिर्धा - कांग्रेस
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1991-96 तक नाथूराम मिर्धा - कांग्रेस
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1997-98 तक भानुप्रताप मिर्धा- बीजेपी
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1998-99 तक राम रघुनाथ चौधरी - कांग्रेस
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1999-2004 तक रामरघुनाथ चौधरी - कांग्रेस
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2004-09 तक भंवर सिंह डांगवास - बीजेपी
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2009-2014 तक ज्योति मिर्धा - कांग्रेस
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2014-2019 तक छोटूराम चौधरी (सीआर चौधरी) - बीजेपी
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2019-2024 तक हनुमान बेनीवाल - रालोपा (BJP)
ये रहा जातीय समीकरण, नागौर लोकसभा में कुल मतदाता
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साल 2019 में 24,09,237
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पुरुष- 24,09,237 महिला 11,56,156
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साल 2024
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पुरुष- 13,88,540
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महिला- 12,84,824
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कुल मतदाता- 26,84,828
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नागौर लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोटर एससी वर्ग तथा जाट, राजपूत, ब्राह्मण और मुस्लिम सहित अन्य जातियां हैं।