पूरे देश में जहां तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की जा रही है और सुप्रीम कोर्ट तक इनकी बिक्री पर बैन लगा चुका है वहां राजस्थान की भाजपा सरकार ने एक हैरतअंगेज निर्णय लेकर हर किसी को हतप्रभ कर दिया है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार राजस्थान की राजे सरकार ने प्रदेश में तंबाकू उत्पादों पर 65 फीसदी तक टैक्स कम कर दिया है, जिससे प्रदेश में बीडी, गुटखा, तंबाकू और सिगरेट के दाम काफी कम हो जाएंगे। प्रदेश सरकार के इस निर्णय की आलोचना शुरू हो गई है।
हैरत की बात ये है कि प्रदेश सरकार अपने इस निर्णय के पीछे लोक हित का तर्क दे रही है। सरकार का कहना है कि लोगों की जरूरतों को देखते हुए तंबाकू उत्पादों पर टैक्स घटाया गया है।
सरकार के निर्णय पर इसलिए भी उंगलियां उठ रही हैं कि छह महीने पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रदेश सरकार के तंबाकू उत्पादों पर सख्त कर लगाने के निर्णय की सराहना करते हुए इसे काबिले तारीफ बताया था।
स्वास्थ्य संगठनों और विपक्ष ने की निर्णय की आलोचना
प्रदेश सरकार द्वारा बीते शुक्रवार को जारी किए गए नए आदेश के अनुसार सिगरेट और गुटखा पर 20 फीसदी तक वैट और अन्य टैक्स कम कर दिए गए हैं। जबकि तंबाकू और इससे बनने वाली बीडी पर 45 से 65 फीसदी तक वैट में कटौती की गई है।
जबकि पान मसाला पर वैट में 35 से 65 फीसदी तक वैट कम किया गया है। सरकार के इस निर्णय से साफ है कि प्रदेश में तंबाकू उत्पादों को और बढ़वा मिलेगा जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ना तय है।
सरकार के इस निर्णय की आलोचना भी शुरू हो गई है। विपक्षी कांग्रेस ने तो इसके लिए सरकार पर निशाना साधा ही है स्वास्थ्य संगठनों ने भी इसके लिए सरकार की आलोचना की है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने कहा कि सरकार तंबाकू उत्पादों के दाम कम कर सीधे सीधे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है।
वे आरोप लगाते हैं कि सरकार का यह निर्णय अपने उन सांसदों और विधायकों की हां में हां मिलाने की तरह है जो यह कहते हैं कि तंबाकू से स्वास्थ्य को कोई हानि नहीं होती।
750 करोड़ रुपए टैक्स से कमाए 1160 बीमारी पर खर्चे
बता दें कि बीते दिसंबर को ही प्रदेश सरकार को विश्व स्वास्थ्य संगठन के साउथ-ईस्ट एशिया के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से तंबाकू उत्पादों पर कड़े टैक्स लागू करने के कारण 'नो टोबेका डे अवार्ड' से सम्मानित किया गया था।
लेकिन सरकार के नए निर्णय ने उस पर उंगली उठनी शुरू हो गई है। राजस्थान वालेंटरी हेल्थ एसोसिएशन के प्रतिनिधि सत्येन चतुर्वेदी बताते हैं कि सरकार को सख्त टैक्स के कारण गत वर्ष 750 करोड़ का राजस्व मिला था, जबकि सरकार ने विधानसभा में खुद स्वीकार किया था कि इससे होने वाली बीमारियों के इलाज में सरकार को 1160 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े।
वहीं सरकार के इस निर्णय का बचाव करते हुए स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड ने कहा कि सख्त टैक्स से जरूरी नहीं है कि तंबाकू पर रोकथाम लगाई जाए। राठौड ने दावा किया कि सरकार तंबाकू के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और हम विभिन्न अभियानों के जरिएए इस पर लगाए लगाएंगे।