पिछले चुनाव में एक दूसरे को जीत-हार का स्वाद चखा चुके 33 सीटों वाले प्रत्याशियों में भाजपा ने अपने 29 विधायकों को पुरानी सीट से ही मौका दिया है, वहीं कांग्रेस ने चार। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में भाजपा को 163 सीटों का प्रचंड बहुमत मिला था और कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई थी।
अपनी पुरानी सीटों पर उतरे प्रत्याशियों की बात करें, तो जोधपुर की सरदारपुरा सीट से अशोक गहलोत फिर भाजपा के शंभू सिंह खेतासर के सामने हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता गहलोत की ये मजबूत सीट है, लेकिन खेतासर ने पिछली बार उनके पसीने छुड़ा डाले थे।
गहलोत इस सीट से लगातार चार बार विधायक और उससे पूर्व पांच बार सांसद रह चुके हैं। पिछले चुनावों में उनकी जीत का अंतर घटकर मात्र 18 हजार का रह गया था और पहली बार चुनाव में खड़े हुए खेतासर ने उनके खिलाफ 59 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे।
जयपुर में भी ऐसी दो सीटें हैं, जिन पर भाजपा सरकार के मंत्री हैं और उन्हें कांग्रेस के पुराने प्रत्याशी चुनौती दे रहे हैं। मालवीय नगर सीट से चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ के सामने कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा हैं, तो सिविल लाइंस सीट से समाज कल्याण मंत्री अरुण चतुर्वेदी हैं, तो कांग्रेस से पूर्व विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास हैं।
नागौर जिले की जायल सीट से दोनों पुरानी महिला उम्मीदवार आमने-सामने हैं। करणपुर सीट से भाजपा के प्रत्याशी खान मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह और कांग्रेस के पूर्व मंत्री गुरमीत कसिंह कुन्नर हैं। कुन्नर मात्र 3800 वोटों से हारे थे। हनुमानगढ़ सीट से एक बार फिर भाजपा के जल संसाधन मंत्री राम प्रताप सिंह के सामने कांग्रेस ने विनोद चौधरी को मौका दिया है।
इसी तरह श्रीमाधोपुर सीट से कांग्रेस से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत के सामने भाजपा से झबर सिंह हैं। जयपुर के नजदीक चौमूं सीट से भाजपा के विधायक राम लाल हैं, तो कांग्रेस से पुराने नेता विधायक भगवान सहाय सैनी हैं।