बीजेपी विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मांग की है कि कांग्रेस सरकार के कुशासन में हो रहे महिला अत्याचार और दलित अत्याचारों के संदर्भ में भी खरगे जी अपना मुंह खोलेंगे और अपना वक्तव्य देंगे। कांग्रेस के मुखिया होने के नाते उन्हें यह जवाब देना चाहिए कि इस तरह के कुशासन के लिए जिम्मेदार कांग्रेस सरकार को अभी तक दंडित क्यों नहीं किया गया। सुधार के लिए कोई भी प्रयत्न क्यों नहीं किए गए। कांग्रेस नेतृत्व की खामोशी में होते रहे अत्याचारों को, कांग्रेस की सहमति ही माना जाएगा और उसे राजस्थान की जनता इस विधानसभा चुनाव में दंडित कर सबक सिखाएगी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राजस्थान की बदतर कानून व्यवस्था को अच्छा बताना, अन्य राज्यों की कानून व्यवस्था को ज्यादा खराब बताना तथा राजस्थान की दुष्कर्म पीड़िताओं को झूठा बताने वाले बयान अशोभनीय एंव निंदनीय हैं। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, पॉक्सो और दुष्कर्म में राजस्थान नंबर एक पर है। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं कि ऐसे मामलों में से 56 प्रतिशत झूठे हैं। ऐसे बयान दुष्कर्म करने वालों के मन में डर कम और प्रोत्साहन ज्यादा पैदा करते हैं।
राजस्थान में पिछले पांच साल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री गहलोत सच्चाई से अंजान हैं, जिस तरह से उनके शासनकाल में हर वर्ग विशेष तौर पर महिलाओं पर क्राइम बढ़ा है, आप इस सत्य से भाग नहीं सकते। बहाने नहीं बना सकते, स्वीकार तो करना पड़ेगा कि आपने पूरे गृह मंत्रालय की ताकत को सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने के लिए ही काम में लिया है। पिछले पांच साल में राजस्थान को अपराध का अड्डा बना चुकी कांग्रेस सरकार नींद से जागने को तैयार नहीं और यहां बेटियां किस कदर भय और आतंक के साये में जी रही हैं। इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसी सरकार को प्रदेश की जनता शीघ्र ही उखाड़ फेंकने को तैयार है।
'राजस्थान वीरों की धरती'
राजस्थान वीरों की धरती है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान करने का इतिहास रखती है। किंतु राजस्थान में अब महिलाओं के हालात ठीक नहीं हैं। महिलाएं पूरी तरह असुरक्षित हो गई हैं, दिन-प्रतिदिन शर्मसार करने वाली घटनाएं हो रही हैं, आभूषण पहनना मुश्किल हो गया है। अपराधियों के इतने हौंसले इतने बढ़े हुए हैं कि बुजुर्ग महिला के पांव के कड़े लूटने के लिए महिला के पैर तक काट दिए जाते हैं। महिला अपराधों में राजस्थान पूरे देश में नंबर वन बना हुआ है, शर्म की बात है कि राजस्थान लगातार तीन साल से दुष्कर्म में भी नंबर वन बना हुआ है। प्रतिदिन 17 दुष्कर्म के मामले होते हैं और हर दो घंटे में एक नाबालिग बच्ची का अपहरण हो जाता है।
महिलाओं की हत्या, बलात्कार, अपहरण और लूट के मामलों में 46 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि होना यह बताता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो राजस्थान के गृहमंत्री हैं, यह पूरी तरह से विफल हो गए हैं और उन्हें अब एक मिनट भी राजस्थान पर राज करने का अधिकार नहीं है। कांग्रेस सरकार के पांच साल में महिलाओं पर अत्याचारों की बाढ़ सी आ गई है। राज्य सरकार और प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी, बल्कि उनका मजाक उड़ाया गया है। अब तो चेन और आभूषण पहनना भी मुश्किल हो गया है। कोटा में सास और बहू को चेन बचाने के लिए संघर्ष करते हुए, अपराधियों से जूझते हुए देखा गया है। सड़कों पर इतनी असुरक्षित महिलाएं कभी भी नहीं थीं, जितनी कि कांग्रेस राज में हो गई हैं। महिलाओं ने इस असुरक्षित स्थिति के चलते अब आभूषण पहनना तक कम कर दिया है।
महिला अत्याचारों से संबंधित मामलों की बात करें तो राजस्थान में साल 2017 में 25,995 केस दर्ज हुए थे। इसके बाद साल 2018 में 27,866 मुकदमे दर्ज हुए। लेकिन साल 2019 में महिला अत्याचारों के मामलों में जबर्दस्त उछाल आया। यहां विभिन्न जिलों में 41,550 केस सामने आए। NCRB की रिपोर्ट, 1314 नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म, महिला अत्याचार और दुष्कर्म के अपराधों में देश में अव्वल है। राजस्थान में सबसे ज्यादा 18 से 30 साल की उम्र वाली युवतियों से दुष्कर्म हुआ, 60 से ज्यादा उम्र की महिलाओं से भी दुष्कर्म के मामले सामने आए।
NCRB द्वारा साल 2019 में दर्ज अपराधों के आंकड़े के अनुसार, राजस्थान में महिलाओं से अत्याचार संबंधित अपराधों में काफी बढ़ोतरी हुई। इनमें दुष्कर्म की घटनाओं में राजस्थान अव्वल रहा है। यहां साल 2019 में महिलाओं और युवतियों से दुष्कर्म के सबसे ज्यादा 5,997 मुकदमे दर्ज हुए। इन आंकड़ों के हिसाब से राजस्थान में रोजाना दुष्कर्म की औसत 16 घटनाएं हुईं। इनमें सबसे ज्यादा दुष्कर्म की वारदातें 16 से 18 साल के उम्र की बच्चियों के साथ हुई। 18 से 30 साल के बीच उम्र वाली युवतियों व महिलाओं से दुष्कर्म की सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं।
बात राजस्थान की करें तो यहां छह साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 15 वारदातें हुई। छह साल से ऊपर और 12 साल से कम उम्र वाली बच्चियों के साथ दुष्कर्म के 70 केस दर्ज हुए। 12 से 16 साल की उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 462 घटनाएं हुई। NCRB के रिकॉर्ड के मुताबिक, राजस्थान में 16 से 18 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 767 घटनाएं हुई। यहां कुल 1,314 नाबालिग बच्चियां दुष्कर्म का शिकार हुई। वहीं, 18 साल से ज्यादा और 30 साल तक उम्र की 3,263 महिलाओं व युवतियों के साथ दुष्कर्म के मामले सामने आए। जबकि 30 से 45 साल की महिलाओं के साथ दुष्कर्म के 1,272 केस दर्ज हुए।
इसी तरह NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में 45 साल से 60 साल की तक की महिलाओं के साथ राजस्थान में दुष्कर्म के 200 केस और 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के साथ रेप के दो मामले सामने आए। पूरे देश में दुष्कर्म के 30,641 केस दर्ज हुए। इनमें 30,868 महिलाएं, बच्चियां और युवतियां दुष्कर्म का शिकार हुईं।
महिला अत्याचारों से संबंधित मामलों की बात करें तो राजस्थान में साल 2017 में 25,995 केस दर्ज हुए थे। इसके बाद साल 2018 में 27,866 मुकदमे दर्ज हुए। लेकिन साल 2019 में महिला अत्याचारों के मामलों में जबर्दस्त उछाल आया। यहां विभिन्न जिलों में 41,550 केस सामने आए। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं पर अत्याचार के मामलों में राजस्थान प्रथम नंबर पर रहा। प्रदेश में महिलाओं के साथ नाबालिकों द्वारा छेड़छाड़ व परेशान करने के मामलों में भी राजस्थान पीछे नहीं है। यहां दर्ज हुए मुकदमों के हिसाब से राजस्थान देश में प्रथम नंबर पर रहा है।