कैसे सर्वे बन गए पार्टी के लिए मुसीबत?
प्रत्याशियों के चुनाव के लिए कांग्रेस ने अलग-अलग स्तर पर चार सर्वे कराए थे। कांग्रेस, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रभारी स्तर पर हुए इन सभी सर्वे के परिणाम अलग-अलग हैं। सूत्रों का कहना है कि जिस स्तर पर ये सर्वे कराए गए हैं, उसके गुट और पसंद के नेताओं को कमजोर होने के बाद भी कुछ बेहतर हालत में दिखाने की कोशिश की गई है, ताकि उस नेता का टिकट कटने की नौबत न आए। यही कारण है कि सर्वे के परिणाम अलग-अलग हैं। इस कारण से भी नामों पर सहमति नहीं बन पा रही है।
टिकट बंटवारे में क्या चाहते हैं गहलोत?
कांग्रेस से टिकट लेने वाले दावेदारों की लिस्ट लंबी है। पार्टी के नेता भी अपने समर्थकों के लिए टिकट मांग रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री गहलोत भी अपने गुट के विधायकों और समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं। वे चाहते हैं कि बागवत में साथ देने वाले विधायकों को टिकट दिया जाए। इनमें करीब 13 निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं। दूसरी तरह कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य सचिन पायलट भी अपने समर्थक विधायकों को टिकट दिलाना चाहते हैं।
कितने नामों पर हो रहा मंथन?
प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं करने वाली कांग्रेस अब 80 नामों पर मंथन कर रही है। इनमें ज्यादातर चेहरे पुराने बताए जा रहे हैं। एक चर्चा ये भी है कि प्रत्याशियों के एलान में देरी होने के कारण कांग्रेस पहली सूची में ही ज्यादा उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है।
टिकट फाइनल करने के लिए क्या हो रहा?
आज शुक्रवार को जयपुर में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई। इसमें टिकटों का फैसला हाईकमान पर छोड़ने के लिए एक लाइन का प्रस्ताव पास किया गया। अब ये पूरी कवायद दिल्ली पहुंच जाएगी। शनिवार को गौरव गोगोई की अध्यक्षता में दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकों का दौर शुरू होगा। नामों पर सहमति बनने के बाद लिस्ट जारी की जाएगी।