जानिए क्या है मामला?
दअरसल, योजना भवन में डीओआईटी का दफ्तर चलता है। जहां रखी अलमारी से एक किलो सोने के बिस्किट और 2 करोड़ 31 लाख 49 हजार 500 रुपये का कैश बरामद हुआ था। मुख्य सचिव ऊषा शर्मा और तमाम बड़े अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी जानकारी भी दी थी। इसके बाद डीओआईटी के ज्वाइंट डायरेक्टर वेदप्रकाश यादव सामने आए और उन्होंने स्वीकार किया कि ये सोना और कैश उसका था, जिसे उसने अलग-अलग समय पर रिश्वत में लिया था।
'बड़े अफसर को बचाने सरकार ने छोटे प्यादे को आगे किया'
ज्वाइंट डायरेक्टर वेदप्रकाश यादव के सामने आने के बाद भाजपा के तत्कालीन राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया था कि बड़े अफसर को बचाने के लिए सरकार ने छोटे प्यादे को आगे कर दिया है। घोटले की सुई डीओआईटी की कंपनी राजकॉम्प इंफो सर्विस लिमिटेड (आरआईएसएल) पर घूम रही थी। जिसमें शीर्ष से लेकर नीचे तक तैनात अफसर कई साल से यहां जमे हुए थे। वित्त विभाग (जिसके एसीएस भी अखिर अरोड़ा ही हैं) ने एक के बाद एक दर्जनों प्रोजेक्ट डीओआई की कंपनी राजकॉम्प इंफो सर्विस लिमिटेड(आरआईएसएल) के मार्फत करवाए।
इन प्रोजेक्ट में भी गड़बड़ियों के आरोप
खास बात यह है कि ज्यादातर प्रोजेक्ट की लागत उनके बजट से कई गुना बढ़ाई गई। आरआईएसएल की लेखा शाखा और एजी की रिपोर्ट में भी इस पर आपत्तियां दर्ज करवाईं गईं। ये सब मामले इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मिलीभगत का खेल यहां लंबे समय से चल रहा था। आईएफएमएस 3.0 प्रोजेक्ट का घोटाला भी इसमें शामिल है। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 289 करोड़ रुपए आंकी गई थी, इसे अप्रैल 2023 में शुरू होना था। लेकिन, प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ और इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपए की पांच अलग-अलग निविदाएं जारी कर दी गईं। सीएजी ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर बार-बार आपत्ति जताई थी। इनके अलावा 640 करोड़ रुपए के ई मित्र प्लस मशीन प्रोजेक्ट, 150 करोड़ का मैन पावर हायरिंग प्रोजेक्ट, ई मित्र एटीएम, भामाशाह डिजिटल पेमेंट किट में भी राजकॉम्प पर गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। जिसकी जांच के लिए एसीबी ने गृह विभाग को पत्र लिखा था।