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संतों को धमकी: गहलोत के मंत्री बोले- बदमाशी की तो निपटेंगे, धर्मस्थल बचाने संत ने किया था आत्मदाह, जानें मामला

Fri, 11 Nov 2022 06:04 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर

सार

संत समाज के प्रदर्शन और बड़े आंदोलन की चेतावनी को लेकर मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने वादे के अनुसार आदिबद्री पर्वत को खनन मुक्त करा दिया है। साधु-संत ज्यादा बदमाशी करेंगे तो सरकार अपना काम करेगी।
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फिर एक जुट हुए साधु-संत। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भरतपुर के डीग और कामां क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन और स्टोन क्रेशर का मामला एक बार फिर गरमा गया। शुक्रवार को जिले के पोसा में 3000 से ज्यादा साधु-संत जुट गए। संत समाज के धरने से प्रशासन में हड़कंप के हालात बन गए। इसी बीच गहलोत सरकार के एक मंत्री के बयान ने मामले को और बिगाड़ दिया। पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने साधु-संतों को धमकी देते हुए कहा कि अगर, प्रदर्शनकारी बदमाशी करेंगे तो सरकार अपने तरीके से निपटेगी। बता दें कि कुछ समय पहले डीग और कामां क्षेत्र के पवित्र धर्मस्थल को बचाने के लिए एक साधु ने आत्मदाह कर लिया था।  

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पसोपा में जुटे साधु-संतों ने करीब डेढ़ घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। श्री मान मंदिर पसोपा ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष राधा कृष्ण शास्त्री ने डीग एसडीएम हेमंत कुमार को ज्ञापन दिया। जिसमें ब्रज क्षेत्र से क्रेशर हटाने की मांग की गई। जिसके बाद आंदोलन की चेतावनी देकर संत समाज के लोग केदारनाथ की ओर रवाना हो गए। संरक्षण समिति के महासचिव ब्रज दास ने कहा कि पवित्र धर्मस्थल से सभी की भावनाएं जुड़ी हुईं हैं। क्षेत्र से क्रेशरों को हटाने के लिए साधु-संत, ग्रामवासी और कृष्ण भक्तों की ओर से एक दिसंबर से आंदोलन शुरू करेंगे। यह आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा। 

इधर, संत समाज के प्रदर्शन और बड़े आंदोलन की चेतावनी को लेकर कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने वादे के अनुसार आदिबद्री पर्वत को खनन मुक्त करा दिया है। लाइसेंसी क्रेशर प्लांट बंद नहीं किए जाएंगे, जो चल रहे हैं वह चलेंगे ही। अगर, साधु-संत ज्यादा बदमाशी करेंगे तो सरकार अपना काम करेगी।

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अवैध खनन के विरोध में संत ने किया था आत्मदाह
भरतपुर के आदिबद्री धाम और कनकांचल पर्वत क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन खनन के विरोध में संत समाज के लोग 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे थे। पसोपा में आंदोलन स्थल पर संत विजयदास ने खुद को आग लगा ली थी। जिससे वह 80 फीसदी झुलस चुके थे। इलाज के दौरान उन्होंने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था। 

जानिए क्या है मामला?
यह पूरा मामला आस्था और नियम-कानूनों का है। ब्रज क्षेत्र के पर्वतों को कृष्णभक्त पवित्र मानते हैं। उनका विरोध माइनिंग को लेकर है, जिसका माइनिंग लाइसेंस गहलोत सरकार में राज्यमंत्री जाहिदा खान के बेटे साजिद खान के पास है। कांग्रेस की सरकार में ही साजिद ने दो खदानों की लीज खरीदी थी। संत समाज इन पहाड़ों को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर वन विभाग को सौंपने की मांग लंबे समय से कर रहा है। 

कृष्णभक्त पवित्र मानते हैं ब्रज क्षेत्र के पहाड़ों को 
भगवान कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा करवाई थी और उसके बाद से ब्रज में सभी पर्वतों की पूजा होती है। आदिबद्री और कनकांचल में हिंदुओं की गहरी आस्था है। पौराणिक कहानी है कि भगवान कृष्ण ने नंद बाबा और यशोदा माता को तीर्थ कराने के लिए आदिबद्री में ही सभी तीर्थों को बुलाया था। इसी जगह पर बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री समेत सभी मंदिर बने हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रज पर्वत की यात्रा करने से चार धामों की तीर्थ यात्रा का फल मिलता है।
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एक दिसंबर से शुरू होगा बड़ा आंदोलन। - फोटो : सोशल मीडिया
2009 में हुआ था पहली बार आंदोलन
यह विवाद नया नहीं है। नवंबर 2009 में साधु-संतों और कृष्ण भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उस समय की कांग्रेस सरकार ने डीग व कामां तहसील के पर्वतों को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने की शुरुआत की थी। उस समय कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा वन क्षेत्र में घोषित होने से रह गया था। इसकी वजह थी कि यह हिस्सा अन्य तहसीलों में पड़ता था। मान मंदिर बरसाना के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री का कहना है कि कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा महत्वपूर्ण है। इसे अब भी संरक्षित वन में शामिल नहीं किया गया है। हकीकत तो यह है कि पिछले 15 साल से साधु समाज इसी पहाड़ी के लिए संघर्ष कर रहा था। 
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