राजस्थान में दलित सीटों पर रखनी होगी नजर
राजस्थान में चुनाव प्रचार अब थम चुका है। 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव में जनता अपने मत का प्रयोग कर प्रदेश मे नई सरकार का गठन करेगी। इस चुनाव में 2294 प्रत्यशियों के भाग्य का फैसला होना है। लेकिन राजस्थान के चुनावी रण में यह काफी महत्वपूर्ण है कि अनुसूचित जाति और जनजाति का मत किस पार्टी को मिलता है क्योकि राज्य में कुल आबादी का तकरीबन एक तिहाई मत इसी समाज का है। ये राजस्थान की 59 सीटों पर जीत-हार के लिए निर्णायक होंगे। बता दें कि राजस्थान में सभी सात मंडलों पर अनुसूचित जाति(एससी) के मतदाता है। हालांकि अनुसूचित जनजाति(एसटी) की बात करें तो उदयपुर संभाग में इनकी संख्या काफी अधिक है।
पिछले कुछ दिनों में दोनों प्रमुख दलों ने चुनावी रैली और रोड शो से यहां मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की है। इन सीटों को लेकर पार्टियों के बीच चुनाव प्रचार के दौरान काफी बयानबाजी देखने को मिली। भाजपा ने जहां इस बार इन वर्गों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं। वहीं कांग्रेस का कहना है कि इस बार हमने इस वर्ग पर भरोसा जताया है। पिछली बार वे लोग बहकावे में आ गए थे।
राजस्थान में आरक्षित सीटें
| मंडल |
सीट |
एससी |
एसटी |
| अजमेर |
29 |
5 |
0 |
| जोधपुर |
33 |
6 |
1 |
| कोटा |
17 |
4 |
1 |
| बीकानेर |
24 |
5 |
0 |
| भरतपुर |
19 |
5 |
3 |
| जयपुर |
50 |
8 |
4 |
| उदयपुर |
28 |
1 |
16 |
| कुल |
200 |
34 |
25 |
यहां से शुरु हुआ दोनों पार्टियों का चुनावी आगाज
प्रदेश की इन सीटों की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत ही उदयपुर के चार भुजा मंदिर से की थी। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी पहली रैली उदयपुर संभाग के सागवाड़ा से शुरू की थी।