फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टिकटें ही खोलेंगी राजस्थान में जीत का दरवाजा

Sun, 06 Oct 2013 07:45 PM IST
समीर शर्मा/जयपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
राजस्थान विधानसभा चुनाव में काफी रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। जो पार्टी जितनी बारीक समझ के साथ उम्मीदवारों को चुनेगी, वह उतनी ज्यादा सीटों का फायदा उठा सकती है।
विज्ञापन


अब तक कांग्रेस और भाजपा, दोनों में से किसी भी पार्टी की लहर नहीं है। भाजपा के पास कांग्रेस सरकार के खिलाफ गिनाने के लिए कई मुद्दे हैं, लेकिन वे जनता के बीच भाजपा के पक्ष में चिंगारी उत्पन्न करने में सफल नहीं हो पा रहे।

इधर, स्थानीय विधायकों से नाराजगी भले ही हो, लेकिन नि:शुल्क दवा व जांच, पेंशन जैसी योजनाओं के चलते लोगों की गहलोत सरकार से कोई खास शिकायतें नहीं हैं।

यदि पार्टियों की बात करें, तो गुटबाजी दोनों ही पार्टियों में मौजूद है। इन स्थितियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि एकतरफा मुकाबले की संभावना अब तक दिखाई नहीं दे रही है।
विज्ञापन


भाजपा को लेना होगा संघ का साथ
भाजपा की अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर मुख्यमंत्री रहते व्यक्तिगत तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। ऐसे में उनकी ओर से वर्तमान सरकार पर उठाए जा रहे भ्रष्टाचार के मुद्दे जनता में अपील नहीं कर पा रहे।

अब भी वसुंधरा राजे के गुट के कुछ नेता उनके कान-आंख बने हुए हैं। जब वे सत्ता में थीं, तब भी यही हाल था और अब वे सत्ता में नहीं हैं, तो भी बात वही है।

इन हालातों के कारण संघ अब भी वसुंधरा को पसंद नहीं करता और पिछले शासन के दौरान उन्होंने संघ को अलग-थलग करके रखा हुआ था।

संघ का साथ वसुंधरा की मजबूरी है और वे संघ को राजी करने का प्रयास भी कर रही हैं।

वैसे भाजपा को देश में चल रही मोदी लहर से काफी उम्मीदें हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो मोदी के नाम से भाजपा को केन्द्र के चुनाव में जरूर फायदा होगा, लेकिन राज्य में जनता के सामने वसुंधरा का चेहरा है।

वर्तमान विधायकों की काटनी होंगी टिकटें
कांग्रेस आलाकमान की ओर से हुए सर्वे में आधे विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खराब पाया गया है। 20 जिले ऐसे हैं जहां से मंत्री, संसदीय सचिव भी हैं, वहां कांग्रेस की स्थिति कमजोर पाई गई है।

जयपुर, भरतपुर, कोटा, जोधपुर, अलवर, सवाईमाधोपुर, करौली, दौसा, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, श्रीगंगानगर, बारां, झालावाड़, बीकानेर, धौलपुर, टोंक, नागौर, उदयपुर व पाली जिलों में कांग्रेस की स्थिति सर्वे में कमजोर आई है।

कांग्रेस को इन जिलों में 60 प्रतिशत प्रतिनिधियों की टिकटें काटनी होंगी, तभी फायदा मिलेगा। यदि इनमें से अधिकतर को उनकी पिछली सीटों पर ही आजमाती है, तो ये दाव उल्टा पड़ सकता है।

हावी हैं जातिगत समीकरण
राजस्थान में सबसे बड़ा जाट समाज है और दोनों ही पार्टियों को टिकट वितरण में जातिगत समीकरणों का ध्यान देना होगा।

पूर्व जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा का मामला हो या पूर्व वन राज्य मंत्री रामलाल जाट का, विभिन्न मंचों में जाट समाज ने इस सरकार के खिलाफ नाराजगी तो दिखाई ही है।
विज्ञापन


हालांकि जाट समाज के राज्य सरकार से नाराज होने की बात को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सिरे से खारिज करते आए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें