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Nagaur News: दल बदले, अदावत वही; तीसरी बार हनुमान और ज्योति होंगे आमने-सामने, इस बार दोनों की पार्टियां बदलीं

Mon, 25 Mar 2024 08:59 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

यहां मुख्य रूप से तीन जातियां हैं। जाट, मुस्लिम और एससी में मेघवाल। इनमें दो जातियां जिधर का रुख कर लेती हैं चुनाव उसी दिशा में मुड़ना तय हो जाता है।
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ज्योति मिर्धा और हनुमान बेनिवाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नागौर में हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा के बीच तीसरी बार आमने-सामने का मुकाबला होगा। हालांकि इस बार दोनों की पार्टियां बदल चुकी हैं। ज्योति मिर्धा BJP से और हनुमान बेनीवाल कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि इसी सीट पर पिछला लोकसभा चुनाव ज्योति ने कांग्रेस से और हनुमान ने BJP गठबंधन से लड़ा था।

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यूं तो राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से नागौर एक है, लेकिन जाटों की सियायत का रुख किस तरफ होगा इसका अंदाजा इसी सीट से लगता है। इसलिए इसे जाट हार्टलैंड कहा जाता है। बीजेपी ने लोकसभा चुनावों के लिए यहां से बाबा नाथूराम मिर्धा की पौती ज्योति मिर्धा को टिकट दिया है। 
इस बार ये सीट इसलिए चर्चा में नहीं है कि बीजेपी ने ज्योति मिर्धा को यहां से टिकट दिया है, बल्कि इसलिए कि उनका मुकाबला उनके सबसे बड़े धुरविरोधी नागौर के पूर्व सांसद और खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल से होगा। ज्योति की तरह हनुमान को भी नागौर की सियासत विरासत में ही मिली है। हनुमान के पिता रामदेव चौधरी किसी जमाने में नाथूराम मिर्धा के सबसे खास थे।
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दो बार ज्योति की हार की वजह बन चुके हैं हनुमान
नागौर लोकसभा सीट पर हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा दो बार सीधे आमने-सामने हो चुके हैं। साल 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में हनुमान ने ज्योति को हरा कर लोकसभा सीट जीती थी। वहीं 2014 के लोकसभा चुनावों में ज्योति के हारने की वजह भी हनुमान बेनीवाल को ही माना गया, क्योंकि उन्होंने ज्योति के वोट काटने का काम किया।

बीजेपी ने क्यों नहीं किया हनुमान बेनीवाल से एलायंस
हनुमान बनीवाल लोकसभा चुनाव लड़ने का तो मन बना चुके हैं, लेकिन उनका एलायंस किस से होगा इस पर आगे के कई समीकरण तय होंगे। BJP ने पिछले लोकसभा चुनावों में नागौर की सीट के लिए उनके साथ गठबंधन किया था। हालांकि किसान आंदोलन में हनुमान इस गठबंधन से बाहर गए गए थे। इसके बाद नागौर में बीजेपी ने हनुमान के विकल्प के तौर पर मिर्धा परिवार पर हाथ रखा। बीजेपी चाहती है कि हनुमान को नागौर से बाहर रखा जाए क्योंकि नागौर में उनके रहते बीजेपी की राजनीति पनप नहीं पा रही। 

कांग्रेस-हनुमान के गठबंधन से भाजपा को कितनी मुश्किल
हालांकि हनुमान का कांग्रेस के साथ गठबंधन होने से बीजेपी के लिए कई सीटों पर मुश्किलें बढ़ेंगी। इनमें नागौर, बाड़मेर, राजसमंद, अजमेर और जयपुर ग्रामीण की सीटें शामिल हैं।

2019 के लोकसभा चुनावों के अनुसार वोटर
कुल वोटर: 17,41,967, 
पुरुष वोटर:  9,06,246, 
महिला वोटर: 8,35,717

1977 से लोकसभा चुनावों के नतीजे

  • साल 1977 में नाथूराम मिर्धा (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • साल 1980 में नाथूराम मिर्धा (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस यू)
  • साल 1984 में रामनिवास मिर्धा (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • साल 1989 में रामनिवास मिर्धा (जनता दल)
  • साल 1991 में नाथूराम मिर्धा (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • साल 1996 में नाथूराम मिर्धा (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • साल 1997 में भानु प्रकाश मिर्धा (भारतीय जनता पार्टी)
  • साल 1998 में राम रघुनाथ चौधरी (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • साल 1999 में रामरघुनाथ चौधरी (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • साल 2004 में भंवर सिंह डांगावास (भारतीय जनता पार्टी)
  • साल 2009 में ज्योति मिर्धा (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • साल 2014 में सीआर चौधरी (भारतीय जनता पार्टी)
  • साल 2019 में हनुमान बेनीवाल (आरएलपी एनडीए गठबंधन)


नागौर निर्वाचन क्षेत्र में लाडनूं, जायल, डीडवाना, नागौर, खींवसर, मकराना, परबतसर और नवां कुल आठ विधानसभा सीटें आती हैं। नागौर लोकसभा सीट पर 1952 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ था।

जातिगत समीकरण
यहां मुख्य रूप से तीन जातियां हैं। जाट, मुस्लिम और एससी में मेघवाल। इनमें दो जातियां जिधर का रुख कर लेती हैं चुनाव उसी दिशा में मुड़ना तय हो जाता है।

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