राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से फर्जी अंकतालिका बनानेवाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिससे राजस्थान में हो रहे पंचायत चुनावों के उम्मीदवारों की मार्कशीट भी शक के दायरे में आ गई है। पकड़े गए गिरोह ने स्वीकार किया है कि पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव लडऩे वाले कुछ प्रत्याशियों को उन्होंने फर्जी कागजात मुहैया कराए हैं।
सरपंच और पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्य पद पर चुनाव लडऩे के लिए राज्य सरकार ने शैक्षणिक योग्यता संबंधी अनिवार्यता लागू की है। जिसके तहत पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्य पद के लिए खड़े उम्मीदवारों को दसवीं पास, सरपंच (सामान्य) को आठवीं तथा सरपंच (आदिवासी क्षेत्र) को पांचवी पास होना अनिवार्य है।
पुलिस के अनुसार बुधवार को सीकर से गिरफ्तार गिरोह के दो सदस्यों के पास से फर्जी मार्कशीट, मोहरें एवं आठवी पास के प्रमाण पत्र बरामद हुए हैं। गिरफ्तार अशोक काबरा तथा बाबूलाल सीकर शहर में आलोक बाल शिक्षण संस्थान के संचालक हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह का यह गोरखधंधा प्रदेशभर में फैला है।
सूत्रों ने बताया कि पुलिस के इस खुलासे के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त रामलुभाया उम्मीदवारों की ओर से दिए गए दस्तावेजों की जांच के निर्देश दे सकते हैं। इस मामले में पुलिस ने अपनी जांच और तेज कर दी है।
प्रदेश में 33 जिला परिषदों के लिए जिला प्रमुख और 9 हजार से ज्यादा पंचायतों के सरपंच के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शैक्षणिक योग्यता को लेकर सरकार का तर्क है कि केन्द्र और राज्य सरकारें गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपए खर्च करते हैं।
लेकिन कई बार सरपंच और प्रधान ने साक्षर नहीं होने के कारण कागजात पर अंगूठा लगा दिया, जिनमें कई अनियमितता थीं। वर्तमान में राजस्थान में तीन हजार से अधिक सरपंचों पर अनियमितता की शिकायतें चल रही हैं।
साक्षर नेता को लेकर विभाग का कहना है कि राशि स्वीकृत करने के लिए चैक या अन्य दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले संबंधित उसका अध्ययन तो कर सके। पंचायत स्तर के नेता साक्षर होंगे, तो वित्तीय और प्रशासनिक गड़बडियां रुक सकती हैं।