कोई व्यक्ति पानी में कितनी देर रह सकता है. एक, दो या पांच घंटा, लेकिन राजस्थान का एक अधेड़ 32 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा। आखिरकार सिविल डिफेंस और पुलिस की मदद से उसे बाहर निकाला गया। इस दौरान उसे अटैक भी आया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल इलाज जारी है।
राजस्थान के बांसवाड़ा में एक अधेड़ जलकुंभी में ऐसा फंसा कि वह 32 घंटे तक पानी में ही रह गया। यहां सिविल डिफेंस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बुजुर्ग को जिंदा बाहर निकाला। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, काली मिट्टी वाले दलदल में अधेड़ जलकुंभी से बुरी तरह उलझा हुआ था। जलकुंभी के बीच वह गर्दन तक पानी में डूबा हुआ था। घटना के बाद अधेड़ को हार्ट अटैक भी आया। उसका महात्मा गांधी राजकीय चिकित्सालय में इलाज चल रहा है। सदर थाना प्रभारी पूनाराम गुर्जर ने बताया कि खांडा डेरा निवासी नानू मंगलवार सुबह 6 बजे घर से मछली पकड़ने के लिए निकला था। जो गलती से गहरे दलदली हिस्से में जलकुंभी के बीच फंस गया था। सिविल डिफेंस की मदद से आदिवासी नानू को बाहर निकाला गया।
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गमछे और चप्पलों से हुई पहचान
मंगलवार सुबह घर से निकला नानू रात तक घर नहीं लौटा। परिजनों ने रात को आसापस में ढूंढा लेकिन कोई पता नहीं चला, पिरजनों ने नजदीकी रिश्तेदारों के यहां भी पता किया। कोई संपर्क नहीं हुआ तो दूसरे दिन सुबह जल्दी तलाश की। बुधवार सुबह करीब 8 बजे परिजन ने बेक वाटर के करीब उसका गमछा और चप्पलें देखी। इससे उन्हें नानू के आस-पास ही होने का अंदेशा हुआ। कई घंटों की तलाश के बाद दलदल के बीच नानू की हलचल दिखी तो घरवालों ने उसे आवाज दी। उसने घरवालों की आवाज सुनकर एक-दो बार पानी से बाहर हाथ निकालने की कोशिश भी की। बाद में पुलिस के माध्यम से पहुंची सिविल डिफेंस की टीम ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद जलकुंभी के दलदल के बीच से नानू को निकाल लिया।
कड़ी मशक्कत के बाद नानू बाहर निकला
परिवार वालों ने मान लिया था कि नानू की मौत हो चुकी है। सभी इधर उधर नानू को ढूंढे लेकिन नानू कही नहीं मिले। परिवार के कुछ लोगों ने तो अंतिम संस्कार की तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन इसी वक्त खबर आई कि नानू पास के तालाब में जलकुंभी में फंसा है। पुलिस और बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद नानू को वहां से बाहर निकाला। पानी से बाहर निकलते ही नानू को दिल का दौरा पड़ गया। अस्पताल में भर्ती कराया गया , जहां करीब 9 घंटे तक नानू को होश नहीं आया।