पैसे की भूख ने मानवता को कई बार शर्मसार किया है। इंसानियत के दुश्मन आपदा में भी अवसर खोजने से बाज नहीं आ रहे हैं। कोरोना महामारी की इस विपदा में भी लोग पैसे के लिए किस तरह इंसानियत को तार-तार कर रहे हैं, इसका उदाहरण राजस्थान के कोटा में देखने को मिला। कोटा में एक पिता को कोरोना से जान गंवाने वाली अपनी बेटी की लाश को कार की सीट पर बांधकर 80 किमी दूर झालावाड़ में अपने घर तक ले जाने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि एंबुलेंस वाले ने 35 हजार रुपये की मांग कर दी।
क्या है पूरा मामला?
मामला राजस्थान के कोटा का है, जहां सोमवार (24 मई) को एक पिता कोरोना से पीड़ित अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए उसे न्यू मेडिकल हॉस्पिटल लाया था, लेकिन बेटी नहीं बच पाई। पिता को एंबुलेंस भी नहीं मिला कि वह अपनी बेटी का शव घर ले जा सके। अस्पताल के बाहर खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस वालों से जब पिता ने मदद मांगी तो उन्होंने 20 से 35 हजार तक रुपये मांग लिए। इतने पैसे न होने पर अंततः मजबूर पिता ने अपनी बेटी की लाश को कार की सीट पर बांधा और 80 किमी दूर झालावाड़ गया।
परिजन लाश को खुद अस्पताल से बाहर लाए
34 साल की सीमा की न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में कोरोना के इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद सीमा के शव को मोर्चरी से अस्पताल के बाहर खड़ी गाड़ी तक लाने के लिए वार्ड ब्वॉय भी नहीं मिले। ऐसे में परिवार वाले ही शव को मोर्चरी से खुद बाहर लेकर आए।
डीएम का बयान
आपको बता दें कि डेड बॉडी को इस तरह ले जाना कोविड प्रोटोकॉल के खिलाफ है, लेकिन मजबूरी में कोई करे भी तो क्या करे? इस मामले में कोटा के डीएम ने कहा, 'हम जांच करवा रहे हैं, प्राइवेट एंबुलेंस वालों पर सख्ती करेंगे।' डीएम का कहना है कि शिकायतकर्ता साफ तौर पर नहीं बता रहा है कि उससे कितने पैसे, किस आदमी ने और किस गाड़ी नंबर ने मांगे? ऐसी स्थिति में आरोपी को पकड़ना मुश्किल है, लेकिन फिर भी हम जांच करेंगे।
प्रशासन ने की करवाई, दो अधिकारी निलंबित
फिलहाल, इस मामले में कोटा नगर निगम के एईएन कपिल और आरटीओ सब इंस्पेक्टर सतवीर सिंह को निलंबित कर दिया गया है और दो संविदा कर्मियों की सेवा भी समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही ज्यादा राशि मांगने वाले अज्ञात एंबुलेंस कर्मी के खिलाफ महावीर नगर थाने में एक एफआईआर भी दर्ज की गई है और दो एंबुलेंस भी सीज की गई है।