डॉक्टरों ने नवजात बच्चे की हार्ट सर्जरी कर बचाई जान।
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कोटा जिले के एक निजी अस्पताल में 8 दिन के बच्चे को पेसमेकर लगाकर उसकी जिंदगी को बचाया गया है। चिकित्सकों के मुताबिक बच्चे की हार्टबीट नॉर्मल से भी काम आ रही थी, लेकिन सर्जरी के बाद अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। कार्डियक सर्जन डॉक्टर पलकेश अग्रवाल ने बताया कि बच्चे के परिजन 11 मार्च को उसको लेकर आए थे। बच्चे का जन्म चार मार्च को हुआ था। नवजात का वजन भी लगभग ढाई किलो के आसपास था। उसकी हार्ट रेट 40 से 50 बीट प्रति मिनट के बीच चल रही थी। नॉर्मली बच्चों की हार्ट रेट 110 से 120 बीट प्रति मिनट होती है। बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसकी ईसीजी और कार्डियक इको करवाई गई। इसके बाद बच्चे की 12 मार्च को सर्जरी की गई। सर्जरी में करीब तीन घंटे का समय लगा।
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डॉ. पलकेश अग्रवाल ने बताया कि नवजात की छाती की साइड से दो सेंटीमीटर का चीरा लगाकर पेसमेकर लगाया गया। सर्जरी के बाद अब बच्चे की हार्ट रेट 120 चल रही है। साथ ही बच्चा अब मां का दूध भी पी रहा है। नवजात के सभी अंग बहुत नजदीक होते हैं। ऐसे में जनरल एनेस्थीसिया में बच्चों की सर्जरी की जाती है। इस प्रोसेसर में जरा सी लापरवाही बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि बच्चे के हृदय की धड़कन अनियमित होने पर यदि समय पर अगर इलाज नहीं होता तो गुर्दे लीवर और अन्य अंग काम करना बंद कर सकते थे।
डॉ. पलकेश अग्रवाल ने बताया कि एक व्यक्ति का दिल मुट्ठी भर जितना बड़ा होता है, जिसमें पेसमेकर लगाने के लिए नसों के जरिए उसे लगाया जाता है, जबकि 8 दिन के बच्चे का दिल मात्र 2x2 सेंटीमीटर का होता है। उसमें पेसमेकर लगाने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है।