केकड़ी जिले के कुशायता गांव में दो लोगों को स्क्रब टाइफस रोग होने की पुष्टि होने पर इलाके में हड़कंप मच गया है। इसके बाद जिला प्रशासन ने पशुपालन विभाग को अलर्ट कर दिया है। पशुपालन विभाग की टीम ने संक्रमित एरिया में दवा का छिड़काव शुरू किया है और पशुपालकों को बचाव के लिए सावधान रहने की हिदायत दी है। उधर दोनों मरीजों को अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पशुओं से फैलता है स्क्रब टाइफस
राजकीय पशु चिकित्सालय सावर के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जांगिड़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार केकड़ी जिले में सावर उपखंड के कुशायता ग्राम की निवासी संतरा खारोल और मनभर खारोल इस बीमारी से संक्रमित पाई गई हैं। उन्हें इलाज के लिए अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया है। यह बीमारी पशुओं के कारण फैलती है, इसलिए एहतियात के तौर पर पशुपालन विभाग को इसके रोकथाम के लिए अलर्ट किया गया है।
साइपरमेथ्रिन दवा का छिड़काव
डॉ. जांगिड़ ने बताया कि शनिवार को कुशायता गांव में राजकीय पशु चिकित्सालय बिसुंदनी की प्रभारी डॉ. रूही मीणा के नेतृत्व में पशुधन सहायक योगेश नाथ योगी, गोरधन पंवार की टीम ने गांव में जहां पर पशुओं को बांधा जाता है, वहां साइपरमेथ्रिन दवाई का छिड़काव कराया। इस संबंध में पशुपालकों को इससे बचाव के लिए पशु के शरीर पर या उसकी चमड़ी पर किसी भी प्रकार का इंफेक्शन या बाह्य परजीवी दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करने की हिदायत दी गई है। वहीं नियमित अंतराल पर पशुओं पर व उनके बांधने की जगह पर साइपरमेथ्रिन दवा को पानी में डालकर स्प्रे करने का सुझाव दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके बचाव के लिए सावर नोडल स्तर पर भी विभिन्न गांवों में इसकी रोकथाम के लिए टीम गठित कर दवा का स्प्रे कराया जाएगा।
स्क्रब टायफस एक गंभीर संक्रामक रोग
इस रोग के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. जांगिड़ ने बताया कि स्क्रब टायफस एक गंभीर संक्रामक रोग है और यह ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमित चिगर्स (सूक्ष्म परजीवी, विशेषकर माइट्स के लार्वा) के काटने से फैलता है, इससे संक्रमित होने पर मरीज को बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द व चकते हो जाते हैं, जो शरीर के मध्य से शुरू होकर बाकी अंगों तक फैलते हैं। इससे मरीज को गले में सूजन, थकान, गंभीर मामलों में खांसी या श्वसन समस्याएं होती हैं, साथ ही मरीज को लगातार बुखार रहता है।