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Rajasthan News: ‘वांगचुक एकांत कारावास में नहीं, सभी कानूनी अधिकार उपलब्ध’, जोधपुर जेल प्रशासन ने SC को बताया

Tue, 14 Oct 2025 06:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर/नई दिल्ली

सार

Jodhpur News: जोधपुर जेल प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एनएसए के तहत बंद सोनम वांगचुक को एकांत कारावास में नहीं रखा गया है और वे सामान्य स्वास्थ्य में हैं। उन्हें आगंतुकों से मिलने सहित सभी कानूनी अधिकार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
 
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के बीच जोधपुर सेंट्रल जेल प्रशासन ने शीर्ष अदालत को एक शपथपत्र (एफिडेविट) देकर बताया है कि वांगचुक को एकांत कारावास (solitary confinement) में नहीं रखा गया है। जेल अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निरुद्ध बंदियों के समान सभी अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें मुलाकात का अधिकार भी शामिल है।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं सोनम वांगचुक की पत्नी - फोटो : अमर उजाला
‘वांगचुक सामान्य स्वास्थ्य में, ले रहे नियमित आहार’
जेल अधीक्षक ने अपने हलफनामे में कहा कि सोनम वांगचुक किसी भी पुरानी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और उनका स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य है। उन्हें नियमित रूप से सामान्य भोजन दिया जा रहा है और वे शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं।
 
‘सामान्य वार्ड की बैरक में रखा गया, एकांत कारावास नहीं’
हलफनामे के अनुसार, कैदी वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल के जनरल वार्ड में 20 गुणा 20 फीट आकार की एक मानक बैरक में रखा गया है, जहां वे वर्तमान में अकेले रहते हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि यह स्थिति एकांत कारावास नहीं है, क्योंकि वांगचुक को निरुद्ध बंदियों के सभी कानूनी अधिकार उपलब्ध हैं।
 

सोनम वांगचुक - फोटो : एएनआई (फाइल)
‘जेल में मुलाकात के नियमों का पालन, स्थानीय पुलिस रहती मौजूद’
जेल अधीक्षक ने बताया कि राजस्थान जेल नियम, 2022 की धारा 538 के तहत, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरुद्ध बंदियों को आगंतुकों से मुलाकात केवल स्थानीय पुलिस की उपस्थिति में करने की अनुमति है। इसी के अनुरूप वांगचुक की मुलाकातों के दौरान पुलिसकर्मी उपस्थित रहते हैं ताकि नियमों का पूर्ण पालन हो सके और उनके मुलाकात के अधिकारों से कोई समझौता न हो।
 
पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी रिहाई की याचिका
यह हलफनामा सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे. अंग्मो द्वारा दायर याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिसमें उन्होंने उनके एनएसए के तहत निरुद्ध किए जाने को चुनौती दी है और तत्काल रिहाई की मांग की है।

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11 दिन बाद पति सोनम वांगचुक से मिलीं गीतांजलि - फोटो : अमर उजाला
हिंसक प्रदर्शन के बाद लगाया गया NSA
सरकार ने वांगचुक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों को भड़काया था। 24 सितंबर को हुए इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर सेंट्रल जेल भेजा गया था।
 
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सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर सिविल लाइंस पत्थर गिरजाघर पर प्रदर्शन करते नागरिक समाज के लोग। - फोटो : अमर उजाला।
क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून?
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) केंद्र और राज्य सरकारों को यह अधिकार देता है कि वे किसी व्यक्ति को भारत की सुरक्षा, रक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानते हुए अधिकतम 12 महीने तक निरुद्ध कर सकते हैं। हालांकि यह निरुद्धि अवधि इससे पहले भी समाप्त की जा सकती है।

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