इस तरह नीला नजर आता है जोधुपर।
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राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर जोधपुर आज गुरुवार को अपना 564वां स्थापना दिवस मना रहा है। 12 मई 1459 में राव जोधा ने जोधपुर की स्थापना की थी। सूर्य की तेज और सीधी किरणें जमीन पर पड़ने से जोधपुर को सूर्य नगरी भी कहा जाता है।
जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्थापना दिवस के मौके पर कहा, पूज्य राव जोधा जी ने आज ही के दिन जोधपुर को देश-दुनिया के नक्शे में एक अपूर्व और अटल पहचान के साथ स्थापित किया था। यह सूर्य नगरी भी है, नीली नगरी भी है। यहां के हर कोने में इंद्रधनुषीय छटा है।
यह मेरे मन, कर्म और धर्म की नगरी है। मैं जोधाणा की मां सी माटी को माथे पर लगाकर यहां के हरेक भाई -बहन को स्थापना दिवस की बधाई देता हूं। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी स्थापना दिवस पर लोगों को बधाई दी।
जोधपुर 16वीं शताब्दी में भी व्यापार का मुख्य केंद्र रहा है। शहर में स्थित आलीशान महल, किले और मंदिर देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। यहां की हस्तकलाएं, लोक नृत्य और संगीत के प्रति भी सैलानियों को आकर्षण रहता है। जोधपुर ऐतिहासिक रजवाड़े की राजधानी भी हुआ करता था। शहर के मेहरानगढ़ दुर्ग के चारों तरफ बने हजारों नीले मकानों के कारण इसे नीली नगरी भी कहा जाता है।