यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने जब कहा मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तो शायद चिकित्सा विज्ञानी उनके ज़ेहन में नहीं रहे होंगे। मगर जोधपुर के सरकारी एमडीएच अस्पताल में जानवरों के लिए बने इंजेक्शन इंसानो को लगा दिए गए।
प्रशासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ दीपक वर्मा ने घटना की पुष्टि की और कहा कि अस्पताल में पहुंची मेरोपेनेम इंजेक्शन की खेप को कब्जे में ले लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
साइड इफ़ेक्ट नहीं
जोधपुर के सरकारी एमडीएच अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि 178 इंजेक्शनों के इस्तेमाल में आने की जानकारी मिली है। उन्होंने आगे बताया कि ये इंजेक्शन गंभीर संक्रमण को ठीक करने में काम आते हैं।
डॉ वर्मा के मुताबिक, ''अभी किसी साइड इफ़ेक्ट की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इन इंजेक्शनो में से सिर्फ एक ग्राम मात्रा ही इस्तेमाल में लाई गई है जबकि जानवरों को ज्यादा मात्रा में दवा दी जाती है।"
अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी तब मिली जब डॉ वर्मा एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ सर्जिकल वार्ड का निरीक्षण कर रहे थे।
मानव इस्तेमाल के लिए नहीं
निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों को वहां मेरोपेनेम इंजेक्शन मिला, जिस पर लिखा था कि यह मानव इस्तेमाल के लिए नहीं है। लेकिन जब तक यह गड़बड़ी पकड़ी गई, तब तक अनेक मरीज़ों पर पशुओं के लिए बने इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा चुका था।
डॉ वर्मा कहते हैं, ''इसमें फ़ार्मासिस्ट के स्तर पर चूक सामने आई है। उसने बिना देखे ही सप्लाई ले ली। उसे हटा दिया गया है और जांच में औषधि निरीक्षक से मदद ली जा रही है।"
सरकारी अस्पतालों में सरकार ने मुफ्त दवा की व्यवस्था कर रखी है। इस इंजेक्शन की आपूर्ति इसी के तहत की गई थी।
बहरहाल, डॉक्टर अब ये कह कर मरीजों को तसल्ली दे रहे है कि इसका कोई नकारात्मक असर नहीं होगा।