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Rajasthan: चीन में जालौर के युवक की छत से फेंककर हत्या, 39वें दिन घर पहुंचा शव

Fri, 02 Aug 2024 07:39 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर

सार

जालौर के रहने वाले युवक को चीन में चार मंजिला इमारत से फेंक दिया गया था, जिसमें उसकी जान चली गई थी। युवक का शव 39वें दिन घर पहुंचा।
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परिजन और मृतक युवक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के जालौर जिले में मोबाइल कारोबारी सतीश माली की अपहरण के बाद हत्या मामले में 39 दिनों के बाद मृतक का शव भीनमाल पहुंचा है। बता दें कि 39 दिन पहले चीन में मोबाइल कारोबारी सतीश माली की अपहरण के बाद हत्या करने का मामला सामने आया था। इसमें उसके परिजनों से करीब एक करोड़ रुपये फिरौती की डिमांड की गई थी।

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बता दें कि परिजन 50 लाख तक की राशि देने के लिए तैयार हो गए थे। लेकिन उसके बाद उससे संपर्क नहीं हुआ और परिजन इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था नहीं कर पाए तो चार मंजिला इमारत से नीचे फेंक कर सतीश की हत्या कर दी गई। इसकी जानकारी परिजनों को 24 जून को दी गई। इसके बाद इसके परिणाम में लगातार शव को भारत लाने के लिए प्रयास भी किया। युवक की चीन में हत्या के मामले में 39वें दिन शुक्रवार शाम 4:30 बजे उसका शव भीनमाल पहुंचा।

जैसे ही शव घर पहुंचा तो परिजन रो पड़े। घर पर अंतिम दर्शन करने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। भीनमाल के भागलभीम रोड निवासी सतीश (24) पुत्र नरसाराम माली का 21 जून को चीन में किडनैप किया गया था। इसके बाद किडनैपर्स ने वॉट्सएप कॉल के जरिए एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। पैसे मुंबई में हवाला के जरिए एक व्यापारी को देने के लिए कहा गया। 
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परिवार वाले रुपयों की व्यवस्था नहीं कर पाए तो चार मंजिला इमारत से नीचे फेंक कर सतीश की हत्या कर दी। इसकी जानकारी परिजनों को 24 जून को दी गई। इसके बाद इसके परिजन लगातार शव को भारत लाने के लिए प्रयास करते रहे। सतीश दो साल से चीन में रहकर मोबाइल एसेसरीज की सप्लाई का काम कर रहा था।

चचेरे भाई दिनेश ने बताया, चीन सरकार ने शव सात दिन पहले सुपुर्द कर दिया था। 24 जुलाई तक दूतावास में बार-बार अवगत कराने के बाद भी अनुमति नहीं मिली। इसके बाद व्यक्तिगत संपर्क करके चीन में बैठे मारवाड़ी व्यापारियों, आरडी फाउंडेशन के सहयोग से शव को भारत के लिए रवाना किया गया। 39 दिन से परिवार खर्चा उठा रहा था। सतीश का परिवार बीपीएल श्रेणी में आता है। ऐसे में सहायता के लिए सभी दस्तावेज दूतावास को सौंपे थे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

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