नेहड़ क्षेत्र के गांवों में जलभराव
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खबर में लगाई गईं तस्वीरें जालौर में चितलवाना क्षेत्र के सादुल की ढाणी की हैं। जहां पर कुछ बच्चे देसी जुगाड़ पानी को पार कर रहे हैं। देसी जुगाड़ के जरिए नाव-पतवार बनाकर यहां के लोगों का आवागमन हो रहा है। ऐसे में पानी को पार करते समय कभी भी हादसा भी हो सकता है। जरा सी भी चूक इन बच्चों की जान जोखिम में डाल सकती है। यहां तक कि पानी को पार करना खतरे से खाली नहीं है। चारों तरफ पानी ही पानी है। इन तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरा गांव एक तालाब के बीच टापू सा बन गया है।
पिछले कई दिनों से अब तक नेहड़ क्षेत्र के गांव में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। चितलवाना क्षेत्र के क्षेत्र के गांव में अधिक बारिश में यही हालात बने रहते हैं। नेहड़ क्षेत्र डूब क्षेत्र है। जहां हर वर्ष अधिक बारिश के दौरान गांवों में पानी भर जाता है, जिससे लोगों का रहना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में यहां के लोगों के घर चारों और पानी से घिरे होने के कारण ग्रामीणों द्वारा देसी जुगाड़ के जरिए नाव-पतवार से रास्ता पार करना पड़ता है। यह कुछ तस्वीरें सादुल की ढाणी चितलवाना की हैं। जो पिछले एक महीने से जलमग्न हैं, जिसके चलते यहां के लोगों का रहना बेहद मुश्किल हो चुका है। पूरा गांव पानी से चारों तरफ जलमग्न हो चुका है। यहां जलभराव के चलते हालात और भी गंभीर हैं। ग्रामीणों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए देसी जुगाड़ नाव बनाकर पानी पार करवाया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा कोई सुध नहीं ली जा रही है। हालांकि, कल राज्यमंत्री सुखराम बिश्नोई भी क्षेत्र के दौरे पर थे। लेकिन इन बाढ़ पीड़ित परिवारों की प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन से कई बार अपील की। लेकिन इस बाढ़ के पानी की निकासी नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार बिपरजॉय तूफान के दौरान हुई बारिश के चलते भी नर्मदा नहर टूटने से चारों तरफ पानी फैला हुआ है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए करीब चार फीट गहरे पानी को पार करना पड़ रहा है। इधर, जलभराव के चलते मच्छरों का प्रकोप भी ज्यादा बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों को जल जनित बीमारियों से ग्रसित भी होना पड़ रहा है। डेंगू, मलेरिया और मच्छरों, कीड़ों और सांप, बिच्छुओं का डर लोगों में हो गया है।