जैसलमेर शहर में रेलवे स्टेशन के पास गुरुवार दोपहर बाद बमनुमा वस्तु मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर शहर कोतवाली की टीम और भारतीय सेना के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सेना के बम निरोधक दस्ते ने दोनों बम को कब्जे में लिया।
भारतीय सेना के बम निरोधक दस्ते ने बताया कि ये स्मोक बम है, जो हेलीकॉप्टर आदि को हेलीपैड बताने और सेना में सिग्नल आदि देने के काम आते हैं। भारतीय सेना दोनों बम को अपने साथ लेकर गई। स्मोक बम मिलने की खबर से लोगों ने राहत की सांस ली।
शहर कोतवाल सवाई सिंह ने बताया कि जैसलमेर के रेलवे स्टेशन के पास पीछे की तरफ झाड़ियों में दो बमनुमा वस्तु मिलने की सूचना मिली। मौके पर जाकर देखा तो झाड़ियों में कचरे के पास दो बम जैसी वस्तु थी। इसके बाद सेना को जानकारी देकर मौके पर बुलाया। सेना के अधिकारी, मीलिट्री इंटेलिजेंस व बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचे।
सेना ने बताया कि ये स्मोक बम है, जो संकेत देने और सिग्नल आदि देने के काम आता है। भारतीय सेना के बम निरोधक दस्ते ने दोनों बम को अपने कब्जे में लिया और अपने साथ लेकर गए। ये बम यहां कैसे पहुंचे, इसकी पड़ताल कर रहे हैं।
क्या होता है स्मोक बम
स्मोक या धुआं बमों का उपयोग अक्सर सैन्य/अग्नि अभ्यास, अग्निशामक प्रशिक्षण और युद्ध के मैदान में अस्पष्ट वस्तुओं के रूप में किया जाता है। धुआं बम भड़कने के बाद जिंक क्लोराइड, जिंक ऑक्साइड, हेक्साक्लोरोइथेन और अन्य रासायनिक अवयवों से युक्त मिश्रित रासायनिक धुआं छोड़ सकते हैं। धुंआ अंदर लेने से श्वसन मार्ग और फेफड़ों को चोट लग सकती है।