राजधानी जयपुर में प्रेस वार्ता करते हुए कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आंदोलन और बवाल करने वाले लोग जनता को मुद्दों से भटका रहे हैं। कुछ मुद्दों पर सहमति और असहमति हो सकती है, लेकिन हमेशा तर्क के आधार पर ही बहस करनी चाहिए। उन्होंने बजरी के विषय में बोलते हुए कहा कि आज राजस्थान में बजरी महंगी मिल रही है। इस विषय को उलझाने की बजाय हमें समाधान की बात करनी चाहिए।
हरीश चौधरी ने कहा, साल 2013 के पहले आम उपभोक्ता बजरी को आसानी से ले जा सकता था। रॉयल्टी के ठेके की जगह 2013 में हाईकोर्ट ने कहा कि बजरी में लीज की व्यवस्था लागू होगी और इस लीज की अवधि पांच साल होगी। खुली बोली लगी और बाड़मेर जिले में 2012-13 में 58 करोड़ 52 लाख की लीज का अधिकार ठेकेदारों को मिला। अब आम उपभोगता लीजधारक से ही बजरी खरीद सकता है। बजरी के दाम के साथ डीएमएफडी, आरएसएमटी, जीएसटी, सीटीओ, सीटीई, सीएसआर और आयकर भी जनता से ही वसूला गया।
बेनीवाल आंदोलन और विवाद किसके हित के लिए कर रहे?
विधायक हरीश चौधरी ने आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल पर तीखे तेवर में आरोप लगाते हुए सवाल किया कि वह आंदोलन और विवाद किसके हित के लिए कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि अभी जुलाई और अगस्त के महीने में खनन नहीं हो सकता, तो बजरी बेच कौन रहा है? सिर्फ लीजधारक को ही इसका अधिकार है। इस व्यवस्था ने लीजधारकों को एक मोनोपॉली दे दी है, जिसका वो फायदा उठा रहे हैं।
विधायक ने कहा, बेनीवाल की मंशा सिर्फ इन ठेकेदारों की मदद करना है। इससे भार राजस्थान के आम उपभोगताओं पर पड़ेगा। खनन के ऊपर लागू पेनाल्टी में भी जनता का ही नुकसान है। चौधरी ने हनुमान बेनीवाल से सवाल करते हुए पूछा कि जब वो गठबंधन की सरकार में सांसद थे, तब मौन क्यों खड़े थे? जनता की आवाज संसद तक क्यों नहीं पहुंचाई? 13 प्रकार के टैक्स के खिलाफ एक भी शब्द क्यों नहीं बोला?
चौधरी ने कहा कि राजस्थान की जनता को सस्ती बजरी कानून और नियम में परिवर्तन से ही मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से एक नई पॉलिसी बनाने की मांग की और यह भी कहा कि राजस्थान सरकार राज्य में छोटे लीजधारक को बढ़ावा देगी और उनके संरक्षण का भी प्रावधान बनाएगी। उन्होंने देश और राजस्थान के संपूर्ण किसानों के लिए नॉन-कमर्शियल ट्रैक्टर के अधिकार की भी मांग की और कहा कि इससे किसान आर्थिक रूप से सफल होंगे।