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Rajasthan News : अपने जिंदा होने की तख्ती लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे युवक ने ज्ञापन सौंपा, जानिये क्या है माजरा

Tue, 01 Oct 2024 11:13 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/ जोधपुर

सार

जोधपुर की पीपाड़ सिटी नगर पालिका ने जिंदा व्यक्ति को अपने रिकॉर्डों में मृत घोषित कर उसके नाम का मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया। अब कागजों में मृत हो चुका सुमेर सिंह हाथ में अपने जिंदा होने की तख्ती लेकर घूम रहा है।
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राजस्थान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीपाड़ सिटी नगर पालिका की लापरवाही का शिकार सुमेर सिंह अपने जीवित होने की तख्ती हाथ में लेकर प्रशासन से न्याय की उम्मीद में घूम रहा है। दरअसल युवक पीपाड़ सिटी, उचियादा बेरा का रहने वाला है और उसे अभी पता चला है कि वह नगर पालिका के डाक्यूमेंट्स में मृत घोषित कर दिया गया है।

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मामले की जानकारी देते हुए युवक ने बताया कि मैं सुमेर सिंह पुत्र सोहनलाल कच्छावाहा उम्र 23 वर्ष, जाति माली, निवासी पीपाड़ सिटी, उचियादा बेरा, जोधपुर का रहने वाला हूं। कुछ समय पहले ही मेरी शादी हुई है और इसी संबंध में मैं अपने और पत्नी के डाक्यूमेंट्स अपडेट करवाने एवं विवाह प्रमाण पत्र बनवाने ई मित्र पर गया था, जहां परिवार के सदस्यों की लिस्ट अपडेट करवाने के दौरान मुझे पता चला कि परिवार की सूची और राशन कार्ड से मेरा नाम कट गया है। 

सुमेर ने बताया कि जब मैंने पीपाड़ सिटी नगर पालिका जाकर इस बारे में पूछताछ की तो नगर पालिका के बाबू ने मुझे वहां से घर भगा दिया। घर आकर 181 हेल्पलाइन नंबर पर मामला बताया तब हेल्पलाइन वालों ने बताया कि आप हमारे डेटाबेस में मृत घोषित हो गए हो और आपका मृत्यु प्रमाण पत्र बन गया है। यह सुनने के बाद मैंने तुरंत पीपाड़ सिटी नगर पालिका जाकर अधिकारी से इस विषय में बात की लेकिन उन्होंने मुझे डरा-धमकाकर धक्के मारकर बाहर निकाल दिया और कहा कि यदि वापस यहां आया तो तुझे गिरफ्तार करवा देंगे। 
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युवक ने जिला कलेक्ट्रर को ज्ञापन देकर गुहार लगाई है कि दस्तावेजों की इस त्रुटि में सुधार करवाया जाए और फर्जी तरीके से जो मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया गया है, उसे ठीक कर मुझे कागजों पुन: जीवित दिखाकर न्याय दिलवाया जाए। साथ ही ये सब फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हुए उन्हें सजा दी जाए।

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व नगर निगम दक्षिण में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्रों के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता होने के बावजूद कैसे इस तरह के फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, इसके लिए जिला कलेक्टर को सख्ती दिखानी ही होगी अन्यथा और न जाने कितने लोग अपने जिंदा होने की तख्ती लटकाए घूमते नजर आएंगे।

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