इस साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। चुनावों में ज़्यादा वक्त नहीं बचा है। इसलिए इन चुनावों से पहले केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी के राष्ट्रीय और राज्य संगठन में अभी से फेरबदल की कवायदें शुरू हो गई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार और बीजेपी राष्ट्रीय संगठन में व्यापक स्तर पर फेरबदल किए जाने की चर्चाएं हैं। पीएम मोदी ने बुधवार को अपने निवास पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के साथ लंबी मंत्रणा की है। जिसके बाद आज जेपी नड्डा राजस्थान के भरतपुर और कल 30 जून को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उदयपुर और जयपुर दौरे पर आ रहे हैं। जनसभाओं के साथ ये दोनों नेता सियासी फीडबैक और संगठन की नब्ज भी टटोलेंगे। चर्चाएं हैं कि पीएम मोदी जुलाई के पहले सप्ताह में मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं। राजस्थान समेत विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। कुछ पुराने मंत्रियों को हटाकर संगठन में भेजने की भी तैयारी है।
राजस्थान से केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए ये सांसद हैं प्रमुख दावेदार
केंद्रीय कैबिनेट में एससी, एसटी, ओबीसी और महिला सांसदों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही राजस्थान से जनरल-ब्राह्मण वर्ग से भी सांसद मंत्री बनाया जा सकता है। फिलहाल राजस्थान से गजेंद्र सिंह शेखावत (क्षत्रिय-राजपूत), भूपेंद्र यादव (ओबीसी), अर्जुनराम मेघवाल (एससी), कैलाश चौधरी (ओबीसी-जाट) वर्ग से केंद्रीय मंत्री हैं। इनके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला (वैश्य वर्ग-जनरल) से आते हैं। इस लिहाज से राजस्थान के कई और भी सांसदों को केंद्र सरकार में मंत्री पद मिल सकता है। प्रदेश से लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में कुल 28 बीजेपी सांसद हैं, लेकिन केंद्रीय मंत्री सिर्फ चार हैं। इनमें गजेंद्र सिंह शेखावत और भूपेंद्र यादव कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि अर्जुनराम मेघवाल और कैलाश चौधरी राज्य मंत्री हैं, जबकि कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला लोकसभा के स्पीकर पद पर हैं। इसलिए चुनावी साल में राजस्थान के कई सांसदों और उनके समर्थक कार्यकर्ताओं की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं।
महिला सांसदों में दीया कुमारी, रंजीता कोली की मजबूत दावेदारी
मोदी मंत्रिमंडल में राजस्थान के राजसमंद से सांसद और जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी (राजपूत-जनरल) और भरतपुर से सांसद रंजीता कोली (एससी) प्रमुख दावेदार हैं। हालांकि महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर दौसा से सांसद जसकौर मीणा का भी नाम चर्चाओं में है, लेकिन उनकी उम्र 75 साल से ज्यादा है।
आदिवासी चेहरे किरोड़ीलाल मीणा, कनकमल कटारा, अर्जुनलाल मीणा दौड़ में आगे
आदिवासी समाज (एसटी) से आने वाले सांसदों में राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा का नाम सबसे ऊपर है। जिनका पूर्वी राजस्थान सहित मीणा वोट बैंक पर अच्छा प्रभाव है। जो राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में ट्राइबल वोट बैंक साधने के लिए अहम हो सकते हैं। बांसवाड़ा सांसद कनकमल कटारा और उदयपुर सांसद अर्जुनलाल मीणा भी मंत्री पद की रेस में शामिल हैं। बीजेपी के केंद्रीय नेताओं और आरएसएस में भी इनकी अच्छी पैठ है।
राहुल कस्वां भी दावेदार
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी (ब्राह्मण-जनरल) वर्ग से हैं। पहले उन्हें भी केंद्रीय मंत्री बनाये जाने की चर्चा थी, लेकिन प्रदेशाध्यक्ष बनाने के बाद वो चर्चाएं कमजोर पड़ गईं। चूरू से सांसद राहुल कस्वां (जाट-ओबीसी) भी मंत्री पद के दावेदारों में शामिल बताए जाते हैं। जयपुर ग्रामीण सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पूर्व में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री रह चुके हैं। पाली सांसद पीपी चौधरी और गंगानगर सांसद निहालचंद मेघवाल पूर्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल रह चुके हैं।
मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद राष्ट्रीय संगठन ने बदलाव की रणनीति
मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के संगठन में बदलाव करने रणनीति बनी है। सूत्र बताते हैं कि राजस्थान सहित कई राज्यों की प्रदेश कार्यकारिणी बनाई जानी है। इसमें व्यापक फेरबदल की चर्चा हुई है। राजस्थान में प्रदेशाध्यक्ष बदला जा चुका है, लेकिन संगठन महामंत्री और प्रभारी भी बदलने की चर्चा काफी वक्त से चल रही है। विधानसभा के साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा केंद्रीय टीम से लेकर सभी राज्यों में जरूरी बदलाव करेगी। बदलाव की रूपरेखा तैयार करने के लिए सोमवार और मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महासचिव बीएल संतोष के साथ भी कई दौर की मीटिंग हुई। केंद्र और राज्यों में नई टीमें तैयार करने पर काफी मशक्कत इस दौरान हुई। सूत्रों के मुताबिक इन बैठकों में कई राज्यों के प्रभारियों और संगठन महामंत्रियों के बदलाव पर सहमति बनी है। राजस्थान के प्रभारी अरुण सिंह और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर हैं। इसके अलावा दूसरे चुनावी राज्यों के भी प्रभारियों-संगठन महामंत्रियों में बदलाव हो सकता है। लंबे वक्त से महासचिव और उपाध्यक्ष पद पर रहने वाले ज्यादातर नेताओं की भी विदाई होगी। केंद्रीय संगठन में खाली पदों को भी भरा जाना है। इसके अलावा कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष को भी बदलने पर सहमति बनी है।
NDA को भी विस्तार देने की योजना
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी की प्लानिंग एनडीए को भी विस्तार देने की है। इसके लिए तेलुगु देशम पार्टी और राष्ट्रीय लोक जनता दल, ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की भी एनडीए में वापसी संभव है। चौटाला की जेजेपी से सहमति बनी है। अकाली दल, विकासशील इंसान पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से बातचीत की प्रक्रिया अभी जारी है। बीजेपी पार्टी बिहार के हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के भी संपर्क में भी हैं। रणनीति इसी महीने तक इन सब पार्टियों को साधकर एनडीए के कुनबे को विस्तार देने की है। बीजेपी जाट बाहुल्य क्षेत्रों में जेजेपी-जनता जननायक पार्टी के साथ मिलकर कुछ सीटों पर टिकटों का बंटवारा कर सकती है। यूपी में विधानसभा चुनाव से पूर्व पार्टी छोड़ने वाले दारा सिंह चौहान जल्द भाजपा में वापसी कर सकते हैं।