राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर अमर उजाला ने कुछ ऐसे युवाओं से बात की जिन्होंने तमाम चुनौतियों के बीच अपने हुनर का लोहा मनवाया है। ऐसे ही युवाओं में शामिल हैं जयपुर की दिपाली और छवि शर्मा, जो बोल और सुन नहीं सकतीं लेकिन उनकी कला की आवाज पूरी दुनिया को सुनाई देती है। इन्होंने अपनी कला के माध्यम से विभिन्न प्रदर्शनियों में पुरस्कार प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।
युवा दिवस के मौके पर अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे चुनौतियों से आगे निकलकर उन्होंने कला का अनूठा संसार रच दिया। संकेतों की भाषा में इन दोनों कलाकारों ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके लिए कला की ये दुनिया कितना मायने रखती है। इन दोनों कलाकारों के साथ सीधे साक्षात्कार के कुछ अंश :
दिपाली और छवि आपकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी आज पूरी दुनिया देख रही है। आपको कैसा लगता है ये सब देखकर?
- हम दोनों बहनों ने अब तक कुल 400 पेंटिंग्स बनाई हैं। कुछ पेटिंग्स 15 दिन में तैयार हो गईं तो कुछ एक महीने में और कुछ को एक साल का वक्त लगा। कई विशिष्ट लोग भी इस प्रदर्शनी को देखने आ रहे हैं। युवा खासतौर पर इन पेंटिंग्स को देखने आ रहे हैं। हमें यह सब देखकर ऊर्जा मिलती है।
जयपुर के अलावा कहीं बाहर भी आपने कोई प्रदर्शनी लगाई है?
- दिपाली ने 5 साल पहले सिंगापुर में भी प्रदर्शनी लगाई थी, जो काफी सराही गई। हम दोनों बहनों ने आईसीजी कॉलेज से विजुअल आर्ट में मास्टर्स की डिग्री ली है। इसके अलावा राजस्थान सरकार की ओर से हमें दिव्यांगजन स्टेट कला अवॉर्ड भी मिल चुका है। दिपाली का विशेष योग्य जन की कला कैटेगरी के लिए राष्ट्रपति अवॉर्ड के लिए नामांकन हो चुका है। इसके अलावा टाटा फाउंडेशन की ओर से दिपाली को ऑल इंडिया लेवल पर पहली रैंकिंग में सबल अवॉर्ड मिल चुका है।
आर्ट गैलरी में प्रस्तुत आपकी पेंटिंग्स की थीम क्या है?
- इस प्रदर्शनी का शीर्षक The Art of Dreams With Silence रखा गया है। इसमें 30 कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं। जिनमें सीरियल आर्ट की परिकल्पना और स्वप्न भरे दृश्यों का साकार रूप है। वहीं छवि ने क्यूबिस्म आर्ट को अपनी रचनाओं में प्रतिनिधित्व दिया है। छवि स्नातकोत्तर स्तर पर IIS यूनिवर्सिटी से स्वर्ण पदक प्राप्त कर चुकी हैं, वहीं दीपाली ने यहीं से रजत पदक प्राप्त किया। कला गुरु राम सिंह आर्टिस्ट और गुरु श्रीमती पूनम माथुर के सान्निध्य में दीपाली और छवि ने अपनी कलाकृतियों को आकार दिया।