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Lok Sabha Election: कांग्रेस के टिकट सियासत की जरूरत या मजबूरी; आखिर क्यों दूसरी सूची में नहीं जुड़ा बड़ा नाम

Fri, 22 Mar 2024 08:07 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस राजस्थान की 25 में से 16 सीटें तय कर चुकी है। गुरुवार शाम जिन 6 सीटों का एलान किया गया, उनमें सीकर की सीट को सीपीएम गठबंधन के लिए खाली छोड़ी गई है। इन नामों को तय करने के पीछे की सियासी वजह क्या रही। जानिए इसकी इनसाइड स्टोरी...
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राजस्थान लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को अपनी एक और सूची जारी कर दी। इसमें जयपुर शहर से सुनील शर्मा, पाली से संगीता बेनीवाल, बाड़मेर-जैसलमेर से उम्मेदाराम, झालावाड़-बारां, से उर्मीला जैन भाया, गंगानगर से कुलदीप इंदौरा को प्रत्याशी बनाया गया और सीकर सीट सीपीएम के लिए छोड़ दी गई। 

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अमराराम को प्रत्याशी बनाने की संभावना
संभावना है कि सीकर की सीट पर सीपीएम अमराराम को प्रत्याशी बनाएगी। टिकट बांटे जाने से पहले कांग्रेस में चर्चा थी कि अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में भी बड़े चहरों को प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा जा सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। राजस्थान के लिए दूसरी सूची में कांग्रेस ने जो प्रत्याशी घोषित किए हैं क्या वे भाजपा की इस आंधी के सामने डट कर खड़े रह पाएंगे, ये बड़ा सवाल है? क्योंकि इनमें से कोई भी प्रत्याशी ऐसा नहीं है जो पहले लोकसभा चुनाव लड़ा या जीता हो।

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कांग्रेस ने इन चेहरों पर दांव क्यूं लगाया इसके पीछे भी बड़ी वजह है

  • सबसे पहली और सबसे बड़ी वजह फंड क्राइसिस-  कांग्रेस मौजूदा समय में ऐसे लोगों को टिकट देना चाहती है जो अपने बूते पर चुनाव लड़ सकें। पार्टी पर कम से कम बोझ आए। 
  • दूसरी सूची में कांग्रेस ने जिन पांच सीटों पर प्रत्याशियों को टिकट दिए गए वे भाजपा का गढ़ मानी जाती है। इन सीटों पर कोई बड़ा चेहरा चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं था। इसलिए उपलब्ध विकल्पों में से ही कांग्रेस को टिकट देना पड़ा।
  • इनमें जयपुर शहर की बात करें तो 1989 से लेकर 2019 तक हुए 9 लोकसभा चुनावों में से सिर्फ एक बार यह सीट कांग्रेस के हाथ आई है।
  • पाली भी भाजपा का गढ़ मानी जाती है, पिछले 9 लोकसभा चुनावों से सात बार यहां भाजपा जीती है। 
  • झालावाड़-बारां सीट भी BJP का किला है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत यहां से सांसद हैं। 
  • गंगानगर एससी सीट है, जहां से पिछले दो चुनाव BJP के निहालचंद जीत रहे हैं। 
  • जयपुर शहर: सुनील शर्मा- इनका परिवारिक बैकग्राउंड ही कांग्रेस का रहा है। इनके बड़े भाई सुरेश शर्मा लंबे समय तक शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। सुनील शर्मा खुद जयपुर में एक प्राइवेट विश्वविद्यालय के संचालक हैं। आर्थिक रूप से न सिर्फ अपना चुनाव लड़ने में सक्षम हैं, बल्कि पार्टी को भी सपोर्ट कर सकते हैं।
  • पाली: संगीता बेनीवाल-  राजस्थान की पाली लोकसभा सीट पर निवर्तमान सांसद पीपी चौधरी बीजेपी के टिकट पर इस बार हैट्रिक लगाने के लिए उतर रहे हैं। कांग्रेस ने जाट के सामने जाट का कार्ड खेला है। कांग्रेस की प्रत्याशी संगीता बेनीवाल जाट होने के साथ महिला भी हैं।
  • बाड़मेर-जैसलमेर: उम्मेदाराम- हाल में आरएलपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए उम्मेदारा बेनीवाल को बाड़मेर- जैसलमेर से टिकट दिया है। लेकिन सियासत में जो दिखता है वह हमेशा सच नहीं होता। आरएलपी में सेंध लगाने वाली कांग्रेस आरएलपी के ही हनुमान बेनीवाल के साथ नागौर सीट पर गठबंधन को लेकर बातचीत कर रही है।
  • झालावाड़-बारां: उर्मीला जैन भाया- राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्री प्रमोद जैन भाया की पत्नी हैं। सियासत में इनकी दिलचस्पी है। इन्हें भाया का रणनीतिक  सलाहकार बताया जाता है। भाया की लगभग हर चुनावी सभा में इनकी मौजूदगी रहती थी। भाया काफी लंबे असरे से अपनी पत्नी को सियासत में लॉन्च करना चाहते थे।
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