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अजब गजब: श्री जी महाराज को सता रही गर्मी? मूर्ति पर पानी की बूंदें देख पुजारी भी हैरान, क्या कहते हैं जानकार

Sun, 07 Jul 2024 09:26 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

श्री जी महाराज मंदिर में शाम की आरती के समय अजब-गजब घटना देखकर हर कोई हैरान रह गया। श्री जी महाराज की मूर्ति पर आरती के दौरान भगवान को चेहरे और गर्दन पर पसीना निकलने लगा।
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भगवान को आ गया पसीना। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शाहपुरा जिला मुख्यालय पर सदर बाजार में स्थित प्रमुख श्री जी महाराज मंदिर में रविवार को एक अनोखी घटना घटी। संध्याकाल की आरती के दौरान पंखा बंद होने से भगवान श्री जी महाराज की मूर्ति के चेहरे और गर्दन पर पसीना आ गया, जिससे मंदिर में उपस्थित भक्तगण हतप्रभ रह गए।

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रविवार को यह घटना तब हुई जब मंदिर में शाम की आरती का आयोजन हो रहा था। आरती के दौरान भक्तों की श्रद्धा और भक्ति अपने चरम पर थी। जैसे ही आरती शुरू हुई तो पंखा बंद कर दिया गया। गर्मी और उमस के कारण भगवान श्री जी महाराज की मूर्ति पर पसीना दिखाई देने लगा। मंदिर के पुजारी पंडित विश्वबंधु पाठक ने बताया कि उन्होंने पहली बार ऐसी घटना देखी है। यह हमारे लिए बहुत ही आश्चर्यजनक और दिव्य अनुभव था। भगवान के चेहरे और गर्दन पर पसीना देखकर हम सभी आश्चर्यचकित रह गए।

भक्तों ने बताया चमत्कार
मंदिर में उपस्थित भक्तों ने इसे भगवान का चमत्कार माना। उनमें से कई ने इस घटना को अपने कैमरों में कैद किया और सोशल मीडिया पर साझा किया। भक्तों का मानना है कि ये भगवान की उपस्थिति और उनकी कृपा का संकेत है। एक भक्त, सुमन देवी ने कहा कि ये भगवान का आशीर्वाद है। यह घटना हमें उनकी उपस्थिति का अहसास कराती है और हमारी भक्ति को और भी मजबूत करती है। मंदिर के भक्तों ने इसे भगवान की शक्ति और उनकी उपस्थिति का प्रमाण माना है। उन्होंने कहा कि यह घटना हमें याद दिलाती है कि भक्ति और श्रद्धा में सच्ची शक्ति होती है। भगवान के प्रति हमारी आस्था और विश्वास हमें कठिनाइयों से उबार सकता है और हमें जीवन में सही मार्ग दिखा सकता है।
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क्या कहते हैं वैज्ञानिक
शाहपुरा में मूर्ति के चेहरे पर पसीना आने के मामले में श्री प्रसिबा राजकीय पीजी महाविद्यालय शाहपुरा के प्राचार्य और रसायन शास्त्र के प्रोफेसर पुष्कर राज मीणा ने इस घटना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ऐसा कैसे संभव हुआ। उन्होंने बताया कि ये हमारी आस्था से जुड़ा विषय है। लोग इसे चमत्कार के रूप में देखते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ऐसा मानसून की वजह से होता है। मानसून के इस मौसम में नमी के दौर में कुछ हाइग्रो स्कोपिक पदार्थ मूर्ति पर जमा हो जाते हैं। वातावरण से ये पदार्थ पानी की बूंद बन बहता दिखता है।

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