गहलोत ने दावा किया कि राजस्थान ने इस दिशा में सबसे पहले कड़ा कदम उठाकर देशभर में मिसाल पेश की है। कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ पहले 10 साल की सजा, फिर उम्रकैद और 10 करोड़ रुपये जुर्माना, साथ ही दोषियों की संपत्ति कुर्क करने जैसा कठोर कानून बनाया था। इसके बाद ही केंद्र सरकार ने कानून बनाया लेकिन उसमें सजा का प्रावधान कम रखा गया।
उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने 2021 में पूर्व आईपीएस अधिकारी महेंद्र कुमावत की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी, जिसने परीक्षा प्रणाली सुधार के सुझाव दिए। उसी आधार पर परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव किए गए। साथ ही एसओजी में एंटी-चीटिंग सेल गठित किया गया, जिसने सैकड़ों आरोपियों को जेल भेजा।
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गहलोत ने कहा कि रीट लेवल-2 परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने पर कांग्रेस सरकार ने उसे रद्द कर समयबद्ध पुनः परीक्षा करवाई और पदों की संख्या बढ़ाकर 50 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी दी। वहीं एसआई भर्ती परीक्षा पर आए हाईकोर्ट के फैसले ने भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर कर दिया है। गहलोत के अनुसार भाजपा जनता के सामने परीक्षा रद्द करने की बात करती रही लेकिन अदालत में इसे रद्द न करने की पैरवी करती रही।