जयपुर में भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग के एडीजी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.12 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के जिम ट्रेनर को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराकर साइबर ठगों की मदद करता था।
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग के अपर महानिदेशक (एडीजी) से 2.12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में महाराष्ट्र से एक जिम ट्रेनर को गिरफ्तार किया है। आरोपी टेलीग्राम चैनल के माध्यम से साइबर ठगों के संपर्क में था और उनके लिए फर्जी बैंक खाते, दस्तावेज और सिम कार्ड का प्रबंधन करता था। पुलिस आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लेकर आई है। उससे साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जा रही है।
टेलीग्राम चैनल के जरिए जुड़ा
आरोपी टेलीग्राम पर 'ब्रो पे' नामक चैनल के जरिए साइबर अपराधियों से जुड़ा था। पैसों के लालच में वह फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने, गिरोह के सदस्यों को होटल में ठहराने और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को संभालने का काम करता था। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए देवा नाम का इस्तेमाल किया। साथ ही, गिरोह के एक अन्य आरोपी रोहित रेवण कटकधोंड को उल्हासनगर के एक होटल में ठहराया और उसकी निगरानी की।
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एपीके फाइल इंस्टॉल कर खातों तक पहुंच बनाई
इसके बाद आरोपी ने रोहित के बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, चेकबुक और तस्वीरें वॉट्सऐप के जरिए गिरोह के सदस्यों को भेजीं। विभिन्न बैंक खातों में ठगी की रकम का लेनदेन कराने के बदले उसे निश्चित कमीशन मिलता था। सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ऐंठे 2.12 करोड़ रुपये
इसके बाद पीड़ित पर लगातार ऑनलाइन निगरानी रखी गई और उन्हें लाइव लोकेशन चालू रखने के लिए दबाव डाला गया। खाते की जांच करने का झांसा देकर आरोपियों ने आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में 2.12 करोड़ रुपये जमा करवा लिए। पुलिस अब ठगी की रकम के लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।