इराक में छिड़ा युद्ध राजस्थान के शेखावाटी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। शेखावाटी के झुंझुनूं, सीकर तथा चूरू से करीब साढे चार से पांच हजार लोग वहां फंसे हुए हैं। ये सभी घबराई आवाज में अपने परिजनों को आपबीती सुना रहे हैं।
इराक में फंसे लोगों का कहना है कि उन्हें खाना नसीब नहीं हो रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि साफ पानी तक का इंतजाम नहीं है, जिंदगी बचाने के लिए मजबूरन बाथरूम का पानी पीना पड़ रहा है।
आसपास गोलियों की आवाजें हैं। बस, दिल में वतन लौटने की आस है। हिंसा बढ़ने की खबरें यहां परिवारों को और विचलित कर रही हैं। अपनों की सलामती के लिए दुआएं-प्रार्थना का दौर चल रहा है।
जिनके अपने वहां फंसे हैं, उनके सगे-संबंधियों के माथे पर चिंचा की लकीरें साफ नजर आ रही है।
हो रहा है खूंन-खराबा
शेखावाटी से इराक में नौकरी करने गए जाटाबास निवासी उमेश कु मार की पत्नी मनीषा इराक से आ रही खबरों से विचलित हो रही थी, कि इस बीच पति के आए फोन ने उसे चिंताओं में डुबो दिया।
उमेश ने अपनी पत्नी को फोन पर बताया कि क्षेत्र में काफी खून-खराबा हो रहा है। खौफ इतना ज्यादा है की लोग घरों से बाहर भी नहीं निकल रहे हैं।
उमेश इराक में मिस्त्री का काम करता है, उसे वेतन मिले करीब तीन माह हो गए हैं।
कम्पनी नहीं पहुंचा रही खाना
इराक में श्रमिक मंजेश ने अपने बड़े भाई मोहनलाल को फोन पर बताया कि हिंसा फैसने के कारण दूसरे देशों के लोग भी काफी परेशान है। यहां पर कोई मदद भी नहीं कर रहा है। हम भी कमरों बंद हैं।
जिस कम्पनी के जरिए वहां गए, वह कम्पनी समय पर खाना तक नहीं पहुंचा रही। इसी तरह से इराक में मजदूर दिलीप ने अपने बड़े भाई रविन्द्र को फोन पर बताया कि जिस स्थान पर हिंसा चल रही है, उस स्थान वे करीब 100-150 सौ किलोमीटर दूर है, लेकिन पूरा इराक हिंसा में जल रहा है।
इसी तरह से झुंझुनूं जिले के अलसीसर निवासी मोहनलाल, विनोद कुमार व दिलीप कुमार भी इराक में फंसे हुए हैं। इनके परिजनों भी व्याकुल हैं।
कम्पनी ने पासपोर्ट भी जमा कराए
इराक में फंसे लोगों का संकट इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि इनके पासपोर्ट कम्पनियों ने जमा किए हुए हैं। जब दूतावास में संपर्क किया तो जवाब मिला कि टिकट लेकर आ जाओ।
इधर, राजस्थान में इनके परिजन कलक्टरों के यहां चक्कर काट रहे हैं। अमिताभ के पिता शायरसिंह और राकेश के पिता खेताराम ने बताया कि हमारे बेटे किरकुक में हैं, जो विद्रोह का केंद्र बना हुआ है।
जनसुनवाई के दौरान कुछ परिवारों ने सासंद संतोष अहलावत से अपनी बात रखी है। जिस पर उन्होंने कहा 'केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी.के. सिंह से एक बार बात कर चुकी हूं। फिर जाकर मुलाकात करूंगी। विदेश मंत्री से मांग करेंगे कि यहां स्थाई तौर पर विदेश मंत्रालय का हेल्प सेंटर शुरू किया जाए।'