सवा करोड़ सरकारी डेटा अब विदेशी कंपनियों के हाथों में
इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए सरकार अपनी डॉट नेट प्रणाली को ओरेकल पर शिफ्ट करने जा रही है। यानी हार्ड वेयर से लेकर सॉफ्टवेयर तक सब कुछ बदला जाएगा। इसके लिए नई खरीद होगी। इनता ही नहीं साढ़े छह लाख सरकारी कर्मचारी, पौने चार लाख पेंशनर्स और करीब 95 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स का डाटा अब आईएफएमएस के जरिए विदेशी कंपनियों के हाथों में होगा।
सीएजी भी जाता चुकी है आपत्ति, जांच के दायरे में भी लिया
सीएजी ने राज्य सरकार को इसका जो जवाब भेजा उसमें इसपर ह्यूमन और डिजिटल रिसोर्स का अनावश्यक खर्च बताया गया है। साथ ही इसे केंद्र सरकार के उस एसएनए मॉडल का विरोधाभासी भी बताया है जिससे राज्य सरकार को हर साल करीब 45 हजार करोड़ रुपए केंद्रीय सहायता के रूप में मिलते हैं। यही नहीं, सीएजी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए इस प्रोजेक्ट को अपनी परफारमेंस ऑडिट के दायरे में भी ले चुकी है जिसके मीमो राज्य सरकार को भेजे जा चुके हैं।
प्रोजेक्ट से क्यों आ रही घोटाले की बू
आईएफएमएस 3.0 प्रोजेक्ट में बड़े घोटाले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 289 करोड़ रुपए आंकी गई थी। अप्रैल 2023 में इसे शुरू होना था, लेकिन इसे शुरू होते होते 2024 आ गया। इसके लिए करीब 500 करोड़ की पांच अलग-अलग निविदाएं जारी की जा चुकी हैं। यही नहीं, इस प्रोजेक्ट को बढ़ाने के लिए 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम कंसलटेंसी के नाम पर खर्च की जा चुकी है।
आईएफएमएस : प्रोजेक्ट शुरू हुआ नहीं, 6 बार में 399 करोड़ की आरएफपी जारी कर दी
| कब |
कितनी RFP जारी |
| 26 अक्टूबर 2021 |
58 करोड़ |
| 28 दिसंबर 2021 |
32 करोड़ |
| 21 फरवरी 2022 |
33.75 करोड़ |
| 23 दिसंबर 2022 |
20.5 करोड़ |
| 03 मार्च 2023 |
98 करोड़ |
| 19 मई 2023 |
157 करोड़ |
दुनिया की बड़ी कंपनियां डॉट नेट पर टेक्नोलॉजी शिफ्ट क्यों?
- जिस डॉट नेट टेक्नोलॉजी को सरकार बदलना चाहती है, दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां उस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं। इसमें डॉट नेट टेक्नोलॉजी को बनाने वाली माइक्रोसॉफ्ट, एसेंचोर, स्टार बक्स, गो डेडी जैसी ग्लोबल कंपनियां हैं।
- इंटरनेट से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक आज भारत में 42 हजार से ज्यादा वेबसाइट्स डॉट नेट टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं, जबकि जावा टेक्नोलॉजी पर चलने वाली बेबसाइट्स का आंकड़ा महज 1300 के आस-पास है।
- सरकार को जाबा सिस्टम ऑपरेट करने के लिए विदेशी कंपनियों से जो मैनपावर लेना होगा, उसकी प्रति मैनपावर की लागत 70 लाख रुपए होगी।
विशेषज्ञ बोले- टेक्नोलॉजी शिफ्ट करने के बड़े खतरे
सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर दीपक यादव ने बताया कि डॉट नेट को जावा (ओरेकल) में शिफ्ट करने पर पूरा सिस्टम नया बदलना होगा। जैसे पुराने सिस्टम में अपग्रेडेशन हो सकता है, लेकिन क्रॉस प्लेटफार्म जाने पर सिस्टम ही नया लेना होगा। जब भी सिस्टम को अपग्रेट किया जाता है उसकी कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस और फिजेबिलिटी स्टेडी होती है। एक सिस्टम डॉट नेट पर है और दूसरा जावा पर है तो इन्हें इंटर कनेक्ट करने में भी परेशानी होगी।
उन्होंने कहा कि डेटा शिफ्ट करने के भी अपने खतरे होते हैं। इसमें डेटा लीक और करप्ट होना के खतरे भी बढ़ जाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट टेक्नोलॉजी पर चलती है।