राजस्थान के मारवाड क्षेत्र में इस बार विधानसभा चुनावों में राजनीति के दिग्गज रहे खिलाडियों के परिजनों को ठुकराते हुए वंशवाद की परम्परा को पनपने नहीं दिया।
आजादी के बाद मारवाड की राजनीति में अहम भूमिका रखने वाले धुरधंर राजनेताओं के परिजनों को इस बार भी चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ही पार्टियों ने उतारा लेकिन जनता ने ऐसे उम्मीदवारों को आगे बढने से रोक दिया।
ऐसे वंशवादी प्रत्याशी हारे अवश्य लेकिन अपने प्रतिद्वंद्वी को कड़ी टक्कर देते हुए दूसरे स्थान पर रहे।
मारवाड के बाडमेर जिले की बाडमेर गुढामालानी एवं चौहटन विधानसभा सीटों से कई राजनैतिक दलों के टिकट सहित निर्दलीय के रूप में आठ बार चुनावी दंगल में उतरने वाले गंगाराम चौधरी ने हर बार सफलता पाई लेकिन भाजपा के प्रचण्ड बहुमत मिलने के बावजूद उनकी पौत्री एवं भाजपा उम्मीदवार प्रियंका चौधरी बाडमेर से चुनाव हार गई।
भाजपा बागी मृदुरेखा चौधरी उसके सामने थी और उसने इस चुनाव में कांग्रेस के मेवाराम जैन का रास्ता ही आसान बनाया। मृदुरेखा 19518 मत हासिल कर प्रियंका को दूसरे स्थान पर धकेलने में कामयाब रही तथा 5913 वोटों के अन्तर से जैन ने सफलता पाई।
कांग्रेस के साथ जीवनभर जुडे रहने वाले स्वर्गीय रामसिंह विश्नोई जोधपुर जिले के लूणी विधानसभा क्षेत्र से आठ बार चुनाव लडे और सात पर विजय हासिल की तथा एक बार उनके पुत्र मलखानसिंह ने जीत दर्ज की लेकिन इस बार भंवरीदेवी अपहरण एवं हत्या मामले में आरोपी होने के कारण मलखान सिंह के साथ पर उनकी मां अमरीदेवी को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन वह भी हार गई।
यहां भी कांग्रेस बागी एवं पूर्व मंत्री राजेन्द, चौधरी ने निर्दलीय के रप में चुनाव मैदान में आकर अमरीदेवी की मुश्किलें बढाई और 18966 वोट लेकर उसके हार के अन्तर को बढाकर 35940 मतों का कर दिया तथा भाजपा के जोगाराम पटेल ने यहां से जीत दर्ज की।