करीब 23 साल पुराने फर्जी पट्टा मामले में गिरफ्तार हनुमानगढ़ के निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को शनिवार को जिला एवं सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई। विधायक की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया। चार दिन की पुलिस रिमांड और एक दिन न्यायिक अभिरक्षा में बिताने के बाद विधायक को अदालत से यह राहत मिली है। नगरीय निकाय चुनाव के बीच पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
जिला अदालत ने दी जमानत
चार दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद सीआईडी-सीबी ने विधायक गणेशराज बंसल को शुक्रवार को सीजेएम कोर्ट में पेश किया था। जांच एजेंसी ने मामले में विस्तृत पूछताछ के लिए अदालत से सात दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड मांगा था। अदालत ने पुलिस रिमांड की मांग को पूरी तरह खारिज करते हुए विधायक को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए।
विधायक की ओर से सीजेएम कोर्ट में जमानत आवेदन लगाया गया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद विधायक के वकीलों ने जिला एवं सेशन न्यायालय में जमानत की अर्जी पेश की। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने विधायक के जमानत आवेदन को मंजूर कर लिया।
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क्या है मामला?
दरअसल ये प्रकरण हनुमानगढ़ जंक्शन के सेक्टर-9 एल में वर्ष 2003 में जारी किए गए भूखंड संख्या 8 और 16 के पट्टों से जुड़ा हुआ है। 17 सितंबर को दर्ज दो अलग-अलग मामलों में विधायक गणेशराज बंसल, उनकी पत्नी एवं तत्कालीन नगर परिषद चेयरपर्सन संतोष बंसल, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी भंवरलाल सोनी, भूखंड मालिक कृष्णा रानी और राजरानी चुघ को नामजद किया गया था।
इन सभी पर धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज के आधार पर पट्टे जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया कि पट्टों में दर्ज विवरण नगर परिषद के मूल रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। आरोप है कि इन्हीं विवरणों के आधार पर सरकारी भूमि को निजी भूमि के रूप में दर्शाकर पट्टे जारी किए गए और अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इस फर्जीवाड़े के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।