जोधपुर में सीआरपीएफ कांस्टेबल नरेश जाट के आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने डीआईजी भूपेंद्र सिंह सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। साथ ही मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। दरअसल, कांस्टेबल नरेश जाट ने सोमवार को करीब 18 घंटे तक अपने क्वार्टर में पत्नी और नाबालिग बेटी को बंधक बनाकर रखा था। जिसके बाद अपनी सर्विस राइफल से उसने खुद को गोली मार ली थी।
इधर, परिजनों ने मांग पूरी नहीं होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है। परिजनों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। मृतक जवान नरेश के पिता ने लिखमाराम ने प्रशासन को एक मांग पत्र सौंपा है।
जिसमें उन्होंने मांग करते हुए कहा, सुसाइड नोट में नामजद आरोंपियों को गिरफ्तारी किया जाए। मामले की जांच हाईकोर्ट के पूर्व जज से करवाई जाए। नरेश की बेटी कनिष्का के बालिग होने पर सरकारी नौकरी और पत्नी उर्मिला को आजीवन पेंशन, ग्रेच्युटी छुट्टी का पैसा आदि एक साथ दिया जाए। बेटी की पढ़ाई का खर्चा सीआरपीएफ उठाएं। इसके अलावा नरेश का अंतिम संस्कार उसके पुश्तैनी गांव राजोला पाली में गार्ड ऑफ ऑनर देकर किया जाए।
सुसाइड से पहले के दो वीडियो सामने आए थे, जानें क्या कहा?
बीते मंगलवार को को जवान नरेश जाट के दो वीडियो भी सामने आए थे। इन वीडियो में उसने बताया कि वह ऐसा क्यों कर रहा था? पढ़ें वीडियो में नरेश ने क्या कहा था। साहब नमस्कार, 1-9-2019 को आरटीसी जोधपुर के नाम से सूरतगढ में रिपोर्ट किया था। दो महीने बाद वहां से वापस जोधपुर पहुंचा। यहां ड्यूटी कर रहा था, लेकिन छुट्टी नहीं मिली तो मैं साहब के पास पहुंचा था। उन्होंने मुझे 15 दिन का टाइम दे दिया था। उसके बाद कोराना टाइम में आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेने गया और मेरा एक्सिडेंट हो गया। इस कारण मुझे छुट्टियां लेनी पड़ी तब डीआईजी भूपेंद्र साहब ने बख्श दिया और ड्यृटी पर लिया। इसके बाद इन्होंने मुझे सूरतगढ भेजा। वहां मेरे गार्ड कमांडर के साथ झगड़ा हुआ। उसने मेरे हाथ पर काटा, इस दौरान बचाव में मेरी कोहनी से उसकी आंख पर लग गई, लेकिन उसने कहा कि मुझे राइफल का बट्ट मारा है।
वीडियो में वह कहता है कि मेरी पोस्ट संतरी ही थी, इसलिए मेरे नाम से राइफल इश्यू है। राइफल कॉक करने की झूठी बात है, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। हां- आज राइफल कॉक किया है और चार राउंड फायर किए तो सभी को पता चला। उस दिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया था। अब मेरे फायर करने के बाद सिविल पुलिस को बुलाया गया है। सीआरपीएफ कमांडो लाए, उसे क्यों नहीं बुलाया गया। मैं आइ साल सिविल में ब्लैक बेल्ट रह चुका हूं। 2010 में ईओसी क्वालिफाइड हूं। मैंने कभी लोगों को परेशान नहीं किया, अच्छे से अपनी ड्यृटी की है। फैमिली परमिशन होने के बाव भी मुझे सूरतगढ ड्यूटी पर भेजा गया, क्यों भेजा गया, इन्हें नहीं पता था फैमिली के साथ रहता हूं।
पांच दिन से कहीं आने-जाने नहीं दे रहे हैं, मेरी ड्यूटी नहीं लगा रहे हैं और न ही मुझे गेट पास दिया जा रहा है। छोटा कर्मचारी हूं, इसलिए मेरी कोई सुनता नहीं है। हर कोई राइफल कॉक करने की बात बोल रहा है, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। छोटे कर्मचारी को फंसाना हो तो बोल दो कि राइफल कॉक किया है। तब नहीं किया था, लेकिन आज कर रहा हूं। यहां डीसी (डिप्टी कमांडेंट) नहीं हैं, एसी (असिस्टेंट कमांडेंट) को डीसी बनाकर बिठाया है। डीसी के नहीं होने के कारण हमारी सुनवाई नहीं होती है।