तीर्थराज मचकुंड में उमड़े श्रद्धालु।
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जिले में गंगा दशहरा के पर्व पर धार्मिक स्थलों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। गंगा दशहरा का पर्व श्रद्धालुओं ने आस्था और श्रद्धापूर्वक मनाया। जिले के ऐतिहासिक तीर्थराज मचकुंड पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। श्रद्धालुओं ने सुबह से ही तीर्थराज मचकुंड के सरोवर पर आस्था पूर्वक स्नान किया। विधि विधान से पूजा-अर्चना कर दान पुण्य किया। तीर्थराज मचकुण्ड पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारकर सुख समृद्धि एवं मोक्ष की कामना की।
तीर्थराज मचकुंड के महंत कृष्णदास ने बताया कि हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व होता है। गंगा दशहरा के दिन विधि विधान से मां गंगा की पूजा अर्चना की जाती है। हर साल जेष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा का पावन पर्व मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक इस दिन मां गंगा मैया स्वर्ग से पृथ्वी पर आई थीं। मां गंगा के आशीर्वाद से मानव जाति के समूचे पापों का विनाश होता है। गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने संपूर्ण पापों का विनाश होता है।
गंगा दशहरा के दिन शहर भर में श्रद्धालुओं में भारी आस्था और उमंग देखी गई। जिले भर के धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। सनातन धर्म के लोगों ने दान पुण्य कर पुण्य प्राप्त किया है। तीर्थराज मचकुंड पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखते हुए चौकी इंचार्ज कृष्णअवतार के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।
फल सत्तू एवं धन के दान का विशेष महत्व
महंत कृष्णदास ने बताया गंगा दशहरा के दिन सनातन धर्म के लोगों को दान करना चाहिए। दान करने से परिवार में सुख समृद्धि एवं धन की वृद्धि होती है। उन्होंने बताया गंगा दशहरा के दिन फल, सत्तू एवं धन जरूरतमंद लोगों को अवश्य दान करना चाहिए। इसके अलावा वस्त्र भी दान कर सकते हैं। धार्मिक ग्रंथों में दान का विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंद और अभावग्रस्त लोगों को ध्यान करने से मां गंगा मैया प्रसन्न होती हैं। मानव के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।