चंबल नदी में होगी जलीय जीवों की गणना
- फोटो : अमर उजाला
धौलपुर में जलीय जीवों को बेहतर संरक्षण एवं अनुकूल वातावरण देने के लिए तीन राज्य के जीव जंतु विशेषज्ञ चंबल नदी में 14 फरवरी से गणना का काम शुरू करेंगे। देश की सबसे स्वच्छ नदी चंबल में सबसे अधिक घड़ियाल, मगरमच्छ एवं डॉल्फिन पाई जाती हैं। 14 फरवरी से गणना का सर्वे शुरू किया जाएगा। 13 दिन तक जलीय जीवों की गणना करने के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, चंबल अंचल की जान चंबल अभ्यारण्य सेंचुरी चंबल नदी में एमपी-यूपी व राजस्थान तीनों राज्यों की सीमाओ को छूते हुए करीब 500 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। इसका सबसे अधिक एरिया 435 किलोमीटर मध्यप्रदेश की सीमा में आता है। वैसे तो चंबल नदी असंख्य जलीय जीवों का बसेरा है, लेकिन चंबल अभ्यारण्य सेंचुरी में घड़ियाल सहित अन्य महत्वपूर्ण जलीय जीव पाले जा रहे हैं। इन जलीय जीवों का वर्ष के अंत में प्रतिवर्ष सर्वे किया जाता है। अभी तक चंबल अभ्यारण्य सेंचुरी में जलीय जीवों की गणना का काम मुरैना स्थित फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी करते आ रहे थे। लेकिन इस बार एमपी के साथ यूपी व राजस्थान तीनों राज्यों के जंतु विशेषज्ञ एक साथ जलीय जीवों का सर्वे करेंगे।
इसके लिए 14 फरवरी को तारीख तय की गई है। निर्धारित तारीख को तीनों राज्यों के विशेषज्ञ मध्य प्रदेश की सीमा में स्थित चंबल किनारे एकत्रित होंगे। यहां से पहले दिन पैदल-पैदल 40 किलोमीटर तक सर्वे किया जाएगा। इसके बाद मोटर वोट की मदद ली जाएगी। बताते हैं कि चंबल में 13 दिन तक जलीय जीवों का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद नदी में पानी के बहाव तथा उसकी गुणवत्ता के नमूने लेकर सरकार को भेजे जाएंगे। डीएफओ स्वरूप दीक्षित का कहना है कि चंबल अभयारण्य की सबसे लंबी सीमा एमपी में है। इसका कुछ हिस्सा राजस्थान व यूपी में भी लगता है। इस बार तीनों राज्यों को अपने सर्वे में शामिल होने के लिए पत्र भेजा था। उनके विशेषज्ञ भी सर्वे में शामिल होंगे। पारदर्शिता के अलावा तीनों राज्यों के विशेषज्ञों की मौजूदगी से फायदा होगा।
घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन का बढ़ रहा कुनबा
चंबल नदी साफ सुथरी होने की वजह से जलीय जीवों का वातावरण अनुकूल माना जाता है। घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन कछुआ समेत अन्य जीवों की वंश वृद्धि लगातार देखने को मिल रही है। मौजूदा वक्त में चंबल नदी के अंदर 2108 घड़ियाल, 878 मगरमच्छ एवं 96 डॉल्फिन है। इसके अलावा नाना प्रकार की प्रजातियों के कछुओं की भी अनगिनत संख्या है। हाल ही में राष्ट्रीय घड़ियाल केंद्र देवरी द्वारा 27 घड़ियाल के शावकों को चंबल नदी में रिलीज किया था। चंबल नदी देश की सबसे स्वच्छ और पवित्र नदी मानी जाती है। जलीय जीवों के लिए चंबल का वातावरण एवं पानी अनुकूल माना जाता है। जलीय जीवों की गणना होने के बाद चंबल में अधिक संख्या वाले जलीय जीवों के क्षेत्र को चिन्हित किया जाएगा। जलीय जीवों के क्षेत्र को चिन्हित कर और अधिक बेहतर वातावरण एवं माहौल अनुकूल बनाया जाएगा।
पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा
चंबल नदी में धौलपुर के राजघाट एवं मुरैना के घाट पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चंबल सफारी की भी व्यवस्था की गई है। वन्य जीव प्रेमियों के साथ देश के कोने-कोने के पर्यटक चंबल नदी पर सफारी का लुत्फ उठाते हैं। घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन एवं नाना प्रकार की कछुओं की प्रजाति को देख काफी रोमांचित होते हैं। धौलपुर जिले में इससे पर्यटन को भारी बढ़ावा मिल रहा है।