नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के दौसा वाले आश्रम के आसपास के लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए आश्रम और वहां होने वाले क्रियाकलापों की हकीकत बयां कर गंभीर आरोप लगाए। लोगों ने बताया कि बाबा रसूखदार व्यक्ति हैं, जिनके दौसा आश्रम पर वीवीआईपी लोगों का आना-जाना रहता था। यहां जब दरबार लगता था उस समय कॉलोनी के बाशिंदे कॉलोनी में आने के लिए अपना आईकार्ड बाबा के निजी सुरक्षा गार्ड्स को दिखाकर ही प्रवेश कर पाते थे। साथ ही बाबा भोले के सेवादारों में अधिकांश महिलाएं हुआ करती थीं।
एसओजी की गिरफ्त में आए पेपर लीक के दोषी हर्षवर्धन पटवारी के मकान पर बाबा का भव्य दरबार लगता था। बाबा वीवीआईपी भक्त और महिलाएं सेवादार हुआ करती थीं। रसूक की बात तो यह थी कि जिस कॉलोनी में बाबा का दरबार लगता था उस दरमियां स्थानीय लोगों को भी कॉलोनी में आने की अनुमति आईडी दिखाने के बाद मिलती थी।
बाबा के समागम के दौरान इलाके में बाबा के प्राइवेट गार्ड ही मोर्चा संभालते थे। लोगों का आरोप है कि महिला सेवादार यदि बाबा से मिलना चाहे तो गार्ड उनके साथ धक्का-मुक्की करने के साथ लातों से भी मारा करते थे। बाबा समागम के दौरान झूले पर बैठकर सत्संग करते थे।
पेपर लीक का आरोपी हर्षवर्धन मीणा के पड़ोसी पुरुषोत्तम ने बताया कि यहां पर बाबा के समागम के दौरान किसी भी तरह की कोई व्यवस्थाएं नहीं हुआ करती थीं। दिन में बाबा के लोग आते थे। रात भर सत्संग चलता था, जिसके चलते आसपास का माहौल भी डिस्टर्ब रहता था।
यहां के रहने वाले सचिन गुर्जर ने बताया कि बाबा भोले थ्री लेयर की सुरक्षा हुआ करती थी। समागम के दौरान की व्यवस्थाओं में अधिकांश महिलाएं ही सेवादार हुआ करती थीं। उन महिलाओं के साथ बाबा के गार्ड बद्तमीजी से पेश आते थे। स्थानीय लोगों की माने तो इस दरबार की खासियत ये थी कि अधिकांश महिलाएं ही बाबा के पास अपनी पीड़ाएं लेकर आती थीं। बाबा के आश्रम में महिला सेवादारों के कागजात भी मिले हैं।
अब एसओजी की गिरफ्त में आए पेपर लीक मामले के दोषी हर्षवर्धन मीणा के लिए भी कहा जा रहा है कि जिस दौरान यहां दरबार लगता था। हर्षवर्धन भी यही मौजूद रहता था, लेकिन जब से एसओजी द्वारा पेपर लीक के मामले में हर्षवर्धन का नाम आया तब से हर्षवर्धन यहां नहीं दिखा।