सफाईकर्मियों की भर्ती के मामले में वाल्मीकि समाज का स्पष्ट रूप से कहना है कि इस भर्ती में जिन लोगों को भर्ती किया जाना है, वह लोग धरातल पर आकर काम करें। इस भर्ती के लिए राजस्थान सरकार ने सफाईकर्मियों के अनिवार्य के रूप में सफाई का अनुभव प्रमाण पत्र मांगा है। लेकिन वाल्मीकि समाज चाहता है कि इस भर्ती में केवल वाल्मीकि समाज ही योग्य माना जाए।
समाज के लोगों का कहना है कि यह भर्ती केवल वाल्मीकि समाज के लिए होनी चाहिए। इसमें अन्य समाज के लोगों को वरीयता न दी जाए, क्योंकि भर्ती होने के लिए अन्य समाज के लोग अनुभव प्रमाण पत्र तो लगा देंगे, लेकिन वह सफाई का काम नहीं करते हैं। वाल्मीकि समाज के लोगों ने शुक्रवार को दौसा के नगर परिषद से निकलकर मुख्य मार्ग, सुंदर दास मार्ग मानगंज, गांधी तिराहे और स्टेशन रोड होते हुए वापस नगर परिषद तक प्रदर्शन किया।
गहलोत सरकार हाय-हाय के नारे लगाए...
वाल्मीकि समाज ने प्रदर्शन के दौरान अशोक गहलोत सरकार हाय-हाय के नारे भी लगाए। इस मौके पर महिला सफाईकर्मियों ने हाथों में झाड़ू लेकर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करने के लिए हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा, राज्य सरकार ने 13 हजार सफाई कर्मियों की भर्ती निकाली है, जिनमें पूर्व में जो लोग संविदा सफाई कर्मी पर लगे हैं और नगर परिषद, नगर पालिका, नगर निगम क्षेत्र में सफाई का काम कर रहे हैं, उन्हें भी प्राथमिकता दी जाए।
चुनावी साल में राजस्थान सरकार की मुश्किलें बढ़ीं...
राजस्थान सरकार एक तरफ जहां अपनी जनता के लिए महंगाई राहत शिविर लगाए हुए है और आने वाले समय में सत्ता वापसी का ख्याल संजोए बैठी है। उसके बीच सफाईकर्मी भर्ती निकालकर सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। वाल्मीकि समाज का सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन जारी है और कांग्रेस को चिंता है कि कहीं यह सत्ता की राह में रोड़ा न बन जाए। क्योंकि बिना आरक्षण प्रावधान के भर्ती निकाली नहीं जा सकती।