राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से पेश उस प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया है, जो केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की तरफ से संजीवनी घोटाले के मामले में आरोपी मानने के लिए लगाई गई थी। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में आदेश संशोधन प्रार्थना-पत्र लगाया था।
पूर्व में एसओजी ने संजीवनी घोटाले में शेखावत को आरोपी नहीं बनाया था, लेकिन इसमें संशोधन करते हुए एसओजी ने शेखावत को मामले में आरोपी बनाया और फिर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में संशोधित प्रार्थना पत्र पेश किया। जिसे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्वीकार कर लिया। जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच ने सरकार की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र को स्वीकार किया।
हाईकोर्ट में सुनवाई की अगली तारीख 30 मई निर्धारित...
राजस्थान हाईकोर्ट इस मामले में अब 30 मई को अगली सुनवाई करेगा। माना जा रहा है अब गजेंद्र सिंह शेखावत को आरोपी माने जाने के बाद उन्हें नोटिस जारी कर हाईकोर्ट जवाब तलब कर सकता है। राज्य सरकार और एसओजी की ओर से मामले में गजेंद्र सिंह शेखावत से पूछताछ के लिए गिरफ्तारी की मांग भी हाईकोर्ट से की जा सकती है। इससे पहले 27 अप्रैल को भी इस मामले में सुनवाई हुई थी। लेकिन समय की कमी के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी।
SOG ने गजेंद्र सिंह को पहले नहीं माना था आरोपी...
पिछली सुनवाई के दौरान SOG ने गजेंद्र सिंह को पहले आरोपी नहीं माना था। राज्य सरकार की ओर से सीनियर कौंसिल एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी करते हुए कहा था कि गजेंद्र सिंह शेखावत को SOG की एफआईआर में न तो आरोपी माना गया है और न ही गिरफ्तार किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने गजेंद्र सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसी दिन संशोधन के लिए प्रार्थना-पत्र पेश किया गया था। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि सुनवाई ऑनलाइन होने से वह ब्रीफिंग के समय सही से अपनी बात को समझा नहीं सके।
हाईकोर्ट की दो अलग-अलग कोर्ट बेंच ने खुद को सुनवाई से किया था अलग...
पूर्व में 28 मार्च और तीन अप्रैल को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज गर्ग और प्रवीर भटनागर की बेंच ने सुनवाई करने से इनकार करते हुए खुद को केस से अलग कर दिया था। अन्य बेंच के समक्ष सुनवाई को कहा था। 13 अप्रैल गुरुवार को हुई सुनवाई में जस्टिस कुलदीप माथुर ने शेखावत को राहत देते हुए एसओजी और राजस्थान में कहीं भी दर्ज एफआईआर पर उनकी संभावित गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और तीन सप्ताह बाद दोबारा सुनवाई के लिए कहा था, जिसके बाद मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई।
क्या है संजीवनी को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाला?
साल 2008 में संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी राजस्थान कोऑपरेटिव एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हुई थी। इसकी शुरुआत बाड़मेर ज़िले से हुई। साल 2010 में संजीवनी सोसायटी मल्टी स्टेट सोसायटी। बन गई थी। इसकी 12 साल में ही 230 से ज्यादा शाखाएं खुल गईं थी। सोसाइटी में हुए घोटाले में इसके मैनेजिंग डायरेक्टर प्रबंध विक्रम सिंह जेल में बंद हैं। करीब एक लाख लोगों से 900 करोड़ की ठगी की जानकारी सामने आई है। इसके तहत फर्जी लोन बांटे गए और ब्याज नहीं लिया गया।
कुछ निवेशकों ने शिकायत की, तो राजस्थान एसओजी को मामला सौंपा गया। जांच में हजारों खाते फर्जी पाए गए। आरोप है कि एमडी विक्रम सिंह ने निवेशकों का पैसा ऐसी कंपनी के शेयर खरीदने में लगाया था, जिसके शेयर होल्डर गजेंद्र सिंह शेखवात भी थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत में इसी मुद्दे पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चल रहा है। 21 फरवरी को सीएम ने शेखावत समेत उनके परिवार को इस घोटाले का आरोपी बताया था। इसके बाद शेखावत ने मार्च के पहले सप्ताह में गहलोत के खिलाफ दिल्ली की कोर्ट में मानहानि का केस दायर कर दिया था, जिसमें सुनवाई जारी है।